हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी पर्व का विशेष महत्व होता है। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था, इसलिए यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। हर वर्ष इसी तिथि पर भक्त बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ अपने घरों, मंदिरों और पंडालों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। यह पर्व अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है। आइए जानते हैं उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से कि गणेश चतुर्थी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन किन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगी। वहीं चतुर्थी तिथि का समापन 15 सितंबर, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।
शुभ योग में मनाया जाएगा उत्सव
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी बहुत ही शुभ मानी जा रही है क्योंकि इस दिन रवि योग बन रहा है। इसके अलावा गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के बीच 10 दिनों में कई विशेष ग्रह योग निर्माण कर रहे हैं। गुरु इस समय कर्क राशि में उच्च के हैं और शनि मीन राशि में वक्री स्थिति में बैठे हुए हैं।
गणेश चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की आराधना करने से घर-परिवार में सुख-शांति आती है, आर्थिक संकट दूर होते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
कैसे करें बप्पा की स्थापना?
1. गणेश जी को घर लाने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें और उसे फूलों, रंगोली और अन्य सजावटी सामानों से सजाएं।
2. शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा एक वेदी पर स्थापित करें।
3. वेदी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और चावल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
4. सबसे पहले ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान गणेश का आह्वान करें।
5. भगवान गणेश की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। स्नान के बाद उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं।
6. भगवान गणेश को उनका सबसे प्रिय भोग मोदक और लड्डू अर्पित करें। इसके साथ ही उन्हें दूर्वा घास, लाल फूल और सिंदूर भी चढ़ाएं। अंत में पूरे परिवार के साथ भगवान गणेश की आरती करें।
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