सावन शुरू हो गया है, जो 28 अगस्त तक रहेगा। सावन में शिव पूजा के अलावा माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व है, देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए सावन में हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है।
इस बार सावन में 4 मंगला गौरी व्रत किए जाएंगे। कब-कब हैं ये व्रत, स्त्रियां क्यों करती हैं मंगल गौरी की पूजा, इसका महत्व और नियम भी जान लें।
मंगला गौरी व्रत 2026 कब
पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 को है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रताप से सुयोग्य वर की प्राप्ति और विवाह की बाधाएं दूर होती हैं। कुंडली में मंगल दोष दूर होता है।
दूसरा मंगला गौरी 11 अगस्त को, तीसरा 18 अगस्त और चौथा 25 अगस्त को रखा जाएगा। इसमें दूसरे मंगला गौरी व्रत पर मासिक शिवरात्रि और चौथा मंगला गौरी व्रत पर भौम प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। ऐसे में शिव जी संग मां पार्वती की पूजा का दोगुना फल मिलेगा।
मंगला गौरी व्रत क्यों किया जाता है
स्कंद पुराण में देवी गौरी की उपासना को सौभाग्य, आयु और समृद्धि देने वाली बताया गया है। व्रतराज में मंगला गौरी व्रत की कथा और पूजन विधि का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से पति पर आने वाले अकाल मृत्यु के संकट टलने और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर व्रत का संकल्प लें। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान के बाद स्वच्छ या नए वस्त्र पहनें। इसके बाद माता मंगला गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। संकल्प मंत्र- मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।
पूजा स्थान पर एक चौकी रखें। उस पर पहले सफेद और फिर लाल वस्त्र बिछाकर माता मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
माता के सामने घी का दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार आटे का दीपक बनाकर उसमें 16 बत्तियां लगाई जाती हैं। इसके बाद माता का ध्यान करें।
इसके बाद माता को चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित कर षोडशोपचार पूजा करें।
मंगला गौरी व्रत में 16 संख्या का विशेष महत्व माना गया है। इसलिए माता को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारी, 16 इलायची, 16 पान, 16 लड्डू, 16 चूड़ियां, सुहाग की सामग्री, फल और मिठाई अर्पित करें। साथ ही पांच प्रकार के सूखे मेवे और सात प्रकार के धान्य (गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) भी चढ़ाएं।
पूजा पूरी होने के बाद मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण करें। इस व्रत में सामान्यतः दिनभर माता पार्वती का स्मरण किया जाता है और एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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