सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होगा। सावन के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत करने का विधान है, ये पर्व दक्षिण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार वरलक्ष्मी व्रत 28 अगस्त 2026 को है। इसके दो दिन बाद सावन पूर्णिमा मनाई जाएगी।
स्कन्द पुराण और भविष्योत्तर पुराण में मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत का फल सभी लक्ष्मी व्रतों के समान या उनसे भी श्रेष्ठ माना गया है। वरलक्ष्मी पूजा विधि में पूजा के चरण, दीवाली की महालक्ष्मी पूजा के समान हैं।
किस समय होती है वरलक्ष्मी पूजा
मुहूर्त ज्योतिष के अनुसार, देवी लक्ष्मी की पूजा करने का सर्वोत्तम समय स्थिर लग्न के समय होता है। मान्यताओं के अनुसार, स्थिर लग्न के समय लक्ष्मी पूजा करने से दीर्घकालीन समृद्धि की प्राप्ति होती है।
वरलक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026
सिंह लग्न पूजा मुहूर्त (प्रातः) – सुबह 05:57 – सुबह 07:29
वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त (अपराह्न) – दोपहर 12:05 – दोपहर 14:23
कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त (सन्ध्या) – शाम 06:09 – रात 07:37
वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि) – रात 10:37 – देर रात 12.33
वरलक्ष्मी व्रत में किस देवी की पूजा होती है
इस व्रत में मां वरलक्ष्मी की पूजा की जाती है। वरलक्ष्मी, महालक्ष्मी का ही वरदान देने वाला स्वरूप हैं। वर का अर्थ है वरदान, इसलिए जो लक्ष्मी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं, उन्हें वरलक्ष्मी कहा जाता है। देवी वरलक्ष्मी का प्रादुर्भाव क्षीर सागर से हुआ था। देवी वरलक्ष्मी का रँग रूप का वर्णन दूधिया सागर के समान किया गया है तथा वे उसी रंग के वस्त्र धारण करती हैं।
महत्व
वरलक्ष्मीव्रतं नाम सर्वसौभाग्यवर्धनम्। आयुरारोग्यसम्पत्तिं पुत्रपौत्रप्रवर्धनम्॥
वरलक्ष्मी व्रत करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, धन-संपत्ति तथा पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति होती है।
वरलक्ष्मी व्रत क्यों किया जाता है
स्कन्द पुराण के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को इस व्रत का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में मगध देश के कुंडिनपुर में रहने वाली एक पतिव्रता महिला चारुमति को माता लक्ष्मी ने स्वप्न में दर्शन दिए और श्रावण मास के शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत करने का आदेश दिया।
चारुमति ने पूरे विधि-विधान से व्रत और पूजा की। व्रत पूरा होते ही उसे धन, वैभव, सौभाग्य और परिवार की समृद्धि का वरदान प्राप्त हुआ। इसके बाद नगर की अन्य महिलाओं ने भी यह व्रत किया और सभी को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिला।
वरलक्ष्मी व्रत करने के फल
* अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
* पति की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
* धन, वैभव और अन्न-धान्य में वृद्धि होती है।
* परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
* संतान सुख और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
* आर्थिक संकट और दरिद्रता दूर होती है।
* घर में स्थायी रूप से मां लक्ष्मी का निवास होता है।
* मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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