खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड केस हाईकोर्ट में रिओपन हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में केस की सुनवाई हुई। इस दौरान रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी मौजूद रहे। डिवीजन बेंच ने केस की अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है।
दरअसल, डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था। जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके।
हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी। तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।
हालांकि, सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। लेकिन अब केस रिओपन होने के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि अमित जोगी को जमानत लेनी होगी।
2003 में हुई थी हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे। जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी।
हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।
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