KWNS – व्यास पाठक, रायपुर lराजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित तूता इलाके में प्रस्तावित फिल्म सिटी निर्माण को लेकर सियासत तेज हो गई है। करीब 1500 पेड़ों की कटाई के फैसले के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार को अनोखा और आक्रामक प्रदर्शन किया। पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता निर्माण स्थल पर खोदे गए गड्ढों में उतर गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
1500 पेड़ों की कटाई का विरोध
कांग्रेस का कहना है कि नवा रायपुर को एक “ग्रीन सिटी” के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे में एक साथ 1500 परिपक्व पेड़ों को काटना पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि इससे न केवल स्थानीय तापमान में वृद्धि होगी, बल्कि पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता उन स्थानों पर बने गड्ढों में उतर गए, जहां फिल्म सिटी निर्माण के लिए पेड़ों को हटाया जाना प्रस्तावित है। उनका कहना था कि सरकार विकास के नाम पर हरियाली का “कत्ल” कर रही है।
‘ग्रीन सिटी’ की पहचान पर सवाल
तूता क्षेत्र अपनी हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यहां कंक्रीट का ढांचा खड़ा कर शहर की मूल अवधारणा से समझौता किया जा रहा है।
विपक्ष का कहना है कि फिल्म सिटी के लिए किसी वैकल्पिक बंजर भूमि का चयन किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने जानबूझकर पेड़ों से आच्छादित क्षेत्र को चुना है।
हसदेव का जिक्र, सरकार पर निशाना
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले हसदेव अरण्य क्षेत्र में हजारों पेड़ों की कटाई हुई और अब सरकार की नजर माना-तूता की हरियाली पर है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ भाजपा सरकार की नीति बन गई है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में “चिपको आंदोलन” की तर्ज पर फैलाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि फिल्म सिटी के नक्शे में बदलाव किया जाए या परियोजना को ऐसे स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, जहां पेड़ों की कटाई की आवश्यकता न पड़े।
सरकार की योजना
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार नवा रायपुर में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर फिल्म सिटी विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और मनोरंजन उद्योग को नई दिशा मिलेगी।
अब देखना होगा कि बढ़ते विरोध के बीच शासन इस परियोजना में कोई संशोधन करता है या अपने फैसले पर कायम रहता है।


