‘विद्यासागर’ डी-लिट उपाधि से अलंकृत हुए द्विवेदी दंपति,डॉ. कुमुदिनी द्विवेदी, डॉ. रविन्द्र द्विवेदी
KWNS – बालाघाट l इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, बालाघाट द्वारा आयोजित राष्ट्रीय साहित्य–पुरातत्व महाभव्य अनुष्ठान में शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण, बालिका शिक्षा, चिकित्सा सेवा, समाज सेवा सहित विविध आयामों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को डाक्टरेट (विद्या वाचस्पति) तथा (विद्यासागर) डी-लिट की मानद उपाधि से गौरवपूर्ण सम्मान प्रदान किया गया। यह समारोह ज्ञान, संस्कृति और शोध-परंपरा के अद्वितीय संगम का साक्षी बना।
शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु द्विवेदी दंपति डॉ. कुमुदिनी द्विवेदी (जिला शिक्षा अधिकारी, सक्ती), डॉ. रविन्द्र द्विवेदी (जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ जांजगीर-चांपा; शिक्षक एवं साहित्यकार) को ‘विद्यासागर’ डी-लिट की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप उपाधि-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं वस्त्र-अलंकरण भेंट किए गए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बालाघाट विधायक माननीय अनुभा मुंजारे, नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर तथा परम सम्माननीय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रामगोपाल सोनी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके कर-कमलों से सभी विभूतियों को अलंकरण प्रदान किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।
सम्मानित शिक्षाविदों ने शिक्षा-प्रशासन, संगठनात्मक नेतृत्व और साहित्य-सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज में ज्ञान-संवर्धन की सशक्त परंपरा स्थापित की है। उनके कार्यों से न केवल विद्यार्थियों को दिशा मिली है, बल्कि शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों को भी नई प्रेरणा प्राप्त हुई है। इस सम्मान से संपूर्ण छत्तीसगढ़, विशेषकर जिला जांजगीर-चांपा एवं जिला सक्ती के शिक्षा-जगत में हर्ष और गौरव का वातावरण व्याप्त है।
कार्यक्रम के आयोजक वीरेन्द्र सिंह गहरवार ‘वीर’, ‘गंगोत्री’ पत्रिका की प्रधान संपादक डॉ. कविता गहरवार, संपादक डॉ. जगदीशचंद्र वर्मा, सह-संपादक डॉ. कुलदीप बिल्थरे तथा कार्यक्रम संरक्षक डॉ. कुलवंत सिंह सलूजा विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ. रविन्द्र द्विवेदी जांजगीर चांपा द्वारा किया गया, जबकि देशभर से पधारे अभ्यागतों, अतिथियों एवं साहित्यविदों के प्रति आभार प्रदर्शन कार्यक्रम संयोजक आचार्य वीरेन्द्र सिंह गहरवार ‘वीर’ ने व्यक्त किया।
समारोह के मुख्य अभ्यागत बालाघाट विधायक माननीय अनुभा मुंजारे ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक केवल ज्ञानदाता ही नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता होते हैं। ‘विद्यासागर’ डी-लिट उपाधि एवं विद्या वाचस्पति डाक्टरेट की मानद उपाधि उन शिक्षकों के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने अपने कर्म, चिंतन और सृजन से शिक्षा-जगत को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं।
इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों ने इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, बालाघाट के 24वें भव्य आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम, मुंबई, राजस्थान एवं गुजरात सहित कई राज्यों से पधारे तथा अलंकृत सभी विभूतियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, बालाघाट के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय अलंकरण समारोह में शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण, चिकित्सा, आयुर्वेद, समाज सेवा, बालिका शिक्षा एवं काउंसिलिंग क्षेत्र से जुड़े लोग भारी संख्या में उपस्थित थे।


