KWNS -प्रिया पाठक, रायपुर l शताब्दी पांडेय ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट की सराहना करते हुए कहा कि इस बार महिलाओं के समग्र विकास को प्राथमिकता देना अत्यंत सकारात्मक पहल है। उन्होंने कहा कि स्व-रोजगार योजनाओं के विस्तार से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा, जिससे वे केवल परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित न रहकर आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगी।
उन्होंने विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को दिए गए प्रोत्साहन का स्वागत करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इन समूहों ने पहले ही सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है। अब वित्तीय सहायता, आसान ऋण सुविधा और बाजार उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाओं से इन समूहों को नई ऊर्जा मिलेगी। इससे छोटे स्तर के घरेलू उद्योग, हस्तशिल्प, कृषि आधारित गतिविधियां और लघु व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
कौशल विकास कार्यक्रमों पर बल देते हुए शताब्दी पांडेय ने कहा कि बदलते समय के साथ महिलाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल साक्षरता और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ना बेहद आवश्यक है। यदि प्रशिक्षण के साथ विपणन और मार्गदर्शन भी सुनिश्चित किया जाए, तो महिलाएं स्थानीय ही नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं।
मातृत्व और स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि स्वस्थ महिला ही सशक्त समाज की आधारशिला होती है। प्रसूति सहायता, पोषण योजनाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच और ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल परिवारों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। अंततः यह बजट महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाकर समावेशी और संतुलित समाज निर्माण की दिशा में मजबूत कदम सिद्ध होगा।


