KWNS -प्रिया पाठक, रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पुनर्वास नीति, बस्तर के विकास और नक्सलवाद के समापन को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़कर उनका पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, पुनर्वास की वास्तविक सफलता तभी है जब सरेंडर करने वाले व्यक्तियों का कौशल विकास हो, उन्हें आर्थिक सहायता मिले, खेती जैसी आजीविका के स्थायी साधन खड़े हों और सामाजिक जीवन सामान्य रूप से आगे बढ़ सके।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पुनर्वास की प्रक्रिया को समग्र दृष्टिकोण से देखती है। उन्होंने कहा, “पुनर्वास का मतलब यही है कि वे मुख्यधारा से जुड़ें। उनका कौशल विकास होता है, कुछ राशि हाथ में दी जाती है, खेती की व्यवस्था खड़ी हो जाए, इनका शादी-ब्याह हो जाए। शुरू से लेकर पूर्ण पुनर्वास तक सरकार उनका ध्यान रखती है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है, ताकि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन मिल सके और वे समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
बस्तर संभाग के विकास पर बोलते हुए विजय शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस घोषणा का उल्लेख किया, जिसमें बस्तर को देश के सर्वाधिक विकसित आदिवासी संभागों में शामिल करने की बात कही गई थी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस लक्ष्य को लेकर आशान्वित है और उपलब्ध प्राकृतिक व मानव संसाधनों के साथ बस्तर में बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र विकास के नए मानक स्थापित करेगा।
नक्सलवाद के समापन को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद के अंत की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि तेलंगाना से सूचना प्राप्त हुई है कि बसव राजू के मारे जाने के बाद नक्सली कमान संभालने वाले व्यक्ति देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहे मल्ला राजू रेड्डी उर्फ संग्राम के सरेंडर को भी उन्होंने “हर्ष का विषय” बताया। विजय शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समापन की घोषणा के अनुरूप देशव्यापी स्तर पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सुरक्षा बलों की रणनीति, विकास कार्यों और पुनर्वास नीतियों के संयुक्त प्रभाव से सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होगा। उपमुख्यमंत्री के इस बयान को राज्य में सुरक्षा और विकास के संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।


