KWNS -प्रिया पाठक, रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा आयोजित होने वाली 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए गोपनीय सामग्री जिलों तक भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजधानी रायपुर के जेएन पांडेय स्कूल परिसर से विभिन्न जिलों और परीक्षा केंद्रों के लिए प्रश्नपत्र सहित अन्य संवेदनशील सामग्री रवाना की गई। बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय मानी जाती है।
हालांकि इस बार सामग्री के परिवहन के तरीके को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ शिक्षक और कर्मचारी परीक्षा सामग्री को बसों तथा यहां तक कि दोपहिया वाहनों (बाइक) से ले जाते हुए दिखाई दिए। संवेदनशील मानी जाने वाली प्रश्नपत्र सामग्री को इस तरह खुले परिवहन माध्यम से भेजे जाने पर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ती है, बल्कि गोपनीयता भंग होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्रों की ढुलाई और भंडारण पूरी परीक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। यदि इसमें जरा भी लापरवाही बरती जाए तो परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है और प्रश्नपत्र लीक जैसी गंभीर घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि बोर्ड की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।
आमतौर पर बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र सीलबंद पैकेटों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत भेजे जाते हैं। कई जगहों पर पुलिस सुरक्षा, जीपीएस ट्रैकिंग, अधिकृत वाहन और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में ही इनकी ढुलाई की जाती है। ऐसे में बस या बाइक जैसे सामान्य वाहनों से परिवहन को लेकर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
इस पूरे मामले में मंडल अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों की चुप्पी से भी संदेह और चर्चा का माहौल बना हुआ है। परीक्षा नजदीक आने के साथ ही अभिभावकों और विद्यार्थियों में चिंता बढ़ रही है कि कहीं इस प्रकार की लापरवाही से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित न हो जाए।
फिलहाल प्रश्नपत्र सामग्री जिलों तक भेजने का कार्य जारी है, लेकिन परिवहन व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है। यदि समय रहते स्पष्टता नहीं दी गई तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।


