KWNS – खगोल विज्ञान और धार्मिक दृष्टि से 17 फ़रवरी 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा, जो वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा। इस प्रकार के ग्रहण को वैज्ञानिक भाषा में “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है, क्योंकि इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता और सूर्य एक चमकते हुए अग्नि-छल्ले जैसा दिखाई देता है।
इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के केंद्र में आकर उसे लगभग 96 प्रतिशत तक ढक लेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।
🌍 क्या भारत में दिखाई देगा ग्रहण?
भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
यह मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में नजर आएगा—
दक्षिणी अफ्रीका — जिम्बाब्वे, नामीबिया, जाम्बिया
अंटार्कटिका
दक्षिण अमेरिका — चिली, अर्जेंटीना
मॉरीशस
🕉️ सूतक काल को लेकर न हों परेशान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल तभी मान्य होता है जब ग्रहण उस क्षेत्र में दिखाई दे।
चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए—
✅ सूतक काल मान्य नहीं होगा
✅ मंदिर खुले रहेंगे
✅ नियमित पूजा-पाठ जारी रहेगा
👁️ देखने में बरतें सावधानी
जहाँ यह ग्रहण दिखाई देगा, वहाँ इसे सीधे नंगी आँखों से देखना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
✔️ केवल प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष Eclipse Glasses से ही देखें
✔️ सामान्य धूप का चश्मा सुरक्षित नहीं होता
जो लोग इसे देखना चाहते हैं, वे NASA या अन्य खगोलीय वेबसाइट्स पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।
🧘 ग्रहण के दौरान क्या करें?
भले ही सूतक लागू न हो, फिर भी आध्यात्मिक दृष्टि से कई लोग ये उपाय करते हैं—
मंत्र जाप — “ॐ नमः शिवाय”
ध्यान और योग
ग्रहण के बाद दान-पुण्य
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी


