KWNS – व्यास पाठक, रायपुर। राजधानी रायपुर के प्रतिष्ठित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर और माता लक्ष्मी नर्सिंग होम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और निर्देश के बाद, ढाई साल पुराने बच्चा बदलने के गंभीर आरोप में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई l
दक्षिण बस्तर के अशोक कुमार सिंह और उनकी पत्नी उषा सिंह ने साल 2022 में संतान प्राप्ति के लिए इस सेंटर का रुख किया था। अप्रैल 2023 में हुई आईवीएफ प्रक्रिया के बाद उषा सिंह के गर्भ में जुड़वा बच्चों की पुष्टि हुई थी। विवाद 25 दिसंबर 2023 को डिलीवरी के दिन शुरू हुआ l
पीड़िता उषा सिंह का आरोप है कि उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन बाद में अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें जो नवजात सौंपे, वे अलग थे। परिजनों ने तुरंत बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाया, जिसे डॉ. नीरज पहलाजानी और डॉ. समीर पहलाजानी ने महज ‘गलतफहमी’ बताकर खारिज कर दिया था।
संदेह गहराने पर पिता अशोक सिंह ने निजी एजेंसी से DNA जांच कराई, जिसके तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया। हाई कोर्ट से राहत न मिलने पर पीड़ित पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और मेट्रोपोलिस पैथोलॉजी लैब समेत अस्पताल संचालकों की भूमिका की गहन जांच हो l
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब रायपुर पुलिस अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, डिलीवरी रिकॉर्ड और डीएनए रिपोर्ट की नए सिरे से स्क्रूटनी करेगी। इस मामले में जल्द ही बड़ी गिरफ्तारियां या सेंटर की मान्यता पर सवाल उठ सकते हैं।


