खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 4 दशक से रक्त रंजित नक्सलवाद के खत्में का अंतिम पड़ाव बहुत करीब नजर आने लगा है। नक्सलियाें के लाल गलियारे में जिस खौफ का साया कभी गहरा हुआ करता था, अब उस रक्तरंजित अध्याय का आखिरी पन्ना पलटने के लिए सुरक्षाबलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र है बस्तर में बचा अंतिम नक्सली कमांडर पापाराव’, वह अंतिम बड़ा नक्सली कमांडर जिसे अब बस्तर के जंगल भी सुरक्षित पनाह देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। बस्तर के शीर्ष नेतृत्व के धराशायी होने के बाद अब पापाराव की गिरफ्तारी या खात्मा इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी, नक्सवाद के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।
बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. का कहना है कि बस्तर वर्तमान में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। वर्ष 2025 के आंकड़े गवाही देते हैं कि जहां 255 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए, वहीं 1,500 से अधिक ने आत्मसमर्पण कर दिया । केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए 31 मार्च की समय सीमा तय की है। बस्तर के शीर्ष नेतृत्व के धराशायी होने के बाद अब पापाराव की गिरफ्तारी या खात्मा इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। बस्तर की धरती अब विकास की नई इबारत लिखने को बेताब है। पापाराव की घेराबंदी केवल एक अपराधी की तलाश नहीं, बल्कि उस खौफनाक विचारधारा के ताबूत में आखिरी कील है, जिसने सालों तक इस बस्तर अंचल की प्रगति को बेड़ियों में जकड़ रखा था।
सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला बस्तर में बचा अंतिम नक्सली कमांडर 52 वर्षीय पापाराव, पुलिस की फाइलों में सुनम चंद्रया, मंगू दादा और चंद्रन्ना जैसे कई नामों से दर्ज है। पापाराव महज एक नाम नहीं, बल्कि नक्सली रणनीतियों का एक मंझा हुआ खिलाड़ी है, जो वर्तमान में पश्चिम बस्तर डिवीजन के प्रभारी और स्टेट जोनल कमेटी मेंबर (एसजेडसीएम) जैसे ऊंचे पद पर बैठा है। इसकी खतरनाक रणनीतियों और युद्ध कौशल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि शासन ने इसके सिर पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम रखा है। कभी 35 खूंखार हथियारबंद लड़ाकों की फौज के साथ चलने वाला यह कमांडर पापाराव आज सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण अकेला पड़ता जा रहा है। बीते सप्ताहांत बीजापुर पुलिस ने जिस तरह से छह नक्सलियों को मार गिराया, उसने पापाराव के नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। इन मारे गए नक्सलियों में वरिष्ठ कैडर दिलीप बेड़जा का मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हुआ। बेड़जा न केवल पापाराव का बेहद करीबी था, बल्कि रसद पहुंचाने और खुफिया जानकारी जुटाने का मुख्य सूत्रधार भी था। उसके खत्म होने से पापाराव अब रसद और सूचनाओं के लिए पूरी तरह मोहताज हो गया है।
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