खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मोदी सरकार के द्वारा मनरेगा योजना से महात्मा गांधी जी का नाम हटाने को लेकर आज शनिवार काे प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। मोदी सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है।
उन्हाेने कहा कि मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था। लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोडों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफ लाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर जरूरी साबित हुआ है । अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा। मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोजगार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा । एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मजदूरों को महीनों तक रोजगार से दूर रखा जा सकता है। मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60- 40 का हो जाएगा, पहले मैचिग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी। मोदी सरकार अब राज्यों पर ‘जी राम जी का लगभग 50 हजार करोड का बोझ डालना चाहती है। उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इस दौरान प्रभारी शकील रिज़वी, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी, पूर्व सभापति कविता साहू, महामंत्री अभिषेक नायडू, महिला कांग्रेस अध्यक्ष, चंपा ठाकुर, व्यापारी प्रकोष्ठ अध्यक्ष राजेंद्र पटवा, यूंका अध्यक्ष निकेत राज झा, रविशंकर तिवारी, छबिराम तिवारी, संजय पाणिग्रही, ललिता राव, कमलेश पाठक, अनुराग महतो, सलीम जाफर अली, एस नीला, शादाब अहमद, रजत जोशी, मोहसिन खान आदि मौजूद रहे।
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