खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब का चुनावी दंगल पूरी तरह सज चुका है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही पत्रकारिता जगत के बड़े-बड़े सूरमा मैदान में उतर आए हैं। अध्यक्ष पद के लिए जहां 6 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं, वहीं महासचिव पद के लिए 8 दावेदार हैं। कुल मिलाकर अलग-अलग पदों के लिए 38 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। सबसे दिलचस्प और कांटे की टक्कर अध्यक्ष पद को लेकर देखने को मिल रही है।अध्यक्ष पद की दौड़ में तीन पूर्व अध्यक्ष आमने-सामने हैं। चार बार के पूर्व अध्यक्ष अनिल पुसद्कर, पूर्व अध्यक्ष के.के. शर्मा और वर्तमान अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर एक-दूसरे को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
अनिल पुसद्कर :
रायपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अनिल पुस्दकर प्रेस क्लब के सबसे लंबे कार्यकाल वाले अध्यक्ष रह चुके हैं। पत्रकारिता और अध्यक्ष दोनों का उन्हें अनुभव है वे इस बार अपने पुराने वोट बैंक के सहारे मैदान में हैं और प्रेस क्लब में कथित आर्थिक अनियमितताओं को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं।
कृष्ण कुमार शर्मा : पूर्व अध्यक्ष के.के. शर्मा प्रेस क्लब में महासचिव, उपाध्यक्ष और अध्यक्ष जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। हालांकि पिछले अध्यक्षीय चुनाव में उन्हें भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। जिससे उनकी छवि को झटका लगा था इस बार पुरानी मतदाता सूची के आधार पर फिर से किस्मत आजमा रहे हैं।
प्रफुल्ल ठाकुर :
वर्तमान अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने पिछले चुनाव में कई दिग्गजों को हराकर चौंकाया था। इस बार उनका पैनल बिखरा हुआ नजर आ रहा है। हिसाब-किताब में गड़बड़ी, टीम के भीतर मतभेद और नाराजगी जैसे मुद्दे उनके लिए चुनौती बने हुए हैं, बावजूद इसके वे अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों को गिनाकर समर्थन मांग रहे हैं। हालांकि प्रचार के दौरान सदस्यों से बहस की खबरें भी आम हो चली है
सुनील नामदेव :
चुनाव में वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव के मैदान में उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया है। भूपेश सरकार के कार्यकाल में अपनी आक्रामक और टारगेटेड पत्रकारिता के कारण सुर्खियों में रहे सुनील नामदेव कई विवादों और मामलों के चलते चर्चा में रहे हैं। प्रेस क्लब की राजनीति का समीकरण भले ही उनके पक्ष में न दिखे, लेकिन मित्र मंडली और पूर्व मुख्यमंत्री के खेमे समर्थन के भरोसे वे मुकाबले में डटे हैं।
मोहन तिवारी
इन सभी दिग्गजों के सामने संगवारी पैनल से मोहन तिवारी एक मजबूत चुनौती के रूप में उभरे हैं। प्रेस क्लब चुनाव कराने की तिथि का मामला हो या नाम कटने, संवैधानिक सदस्यता जैसे मुद्दे की लड़ाई में मोहन तिवारी की सक्रिय भूमिका रही है। जिन सदस्यों के नाम हटाए गए थे, उन्हें जोड़ने के लिए उनके संघर्ष ने उन्हें जमीनी समर्थन दिलाया है। यही वजह है कि संगवारी पैनल के प्रत्याशी के प्रत्याशी के रूप में सभी बड़े उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं।
छठे उम्मीदवार के रूप में प्रशांत दुबे भी मैदान में हैं। वे पहले महासचिव रह चुके हैं और प्रेस क्लब के सदस्य उनके कामकाज की शैली को भली-भांति जानते हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार समूह से पारिवारिक संबंध और और उनकी चुनावों को लेकर सक्रियता चुनावी संजीवनी बनी हुई है
महासचिव के लिए अष्टकोणीय मुकाबला :
महासचिव पद पर अष्टकोणीय मुकाबला है क्योंकि सभी आठ उम्मीदवार मजबूत दिख रहे है दो इलेक्ट्रॉनिक और दो प्रिंट के चार बड़े दावेदार आपस में वोट काट रहे हैं जिससे कम मार्जिन में जीत हार होगी ऐसी संभावना बन रही है, इसलिए किसी भी वोटर को कम कर नहीं आता जा सकता।
Trending
- रायपुर में भाजपा का ‘विजय शंखनाद’: एकात्म परिसर में मनाया गया भव्य उत्सव
- बस्तर अब शांति और विश्वास का गढ़, विकास के लिए नवाचार जरूरी- रमेन डेका
- सुशासन का ‘सरोधी’ मॉडल: सीएम की चौपाल में मिनटों में हुआ 1.50 लाख के ऋण का समाधान
- सही दवा, शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार”
- दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ‘साइलेंट 777’ ऐप के जरिए चल रहे IPL सट्टे का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार
- सुशासन से सशक्त होती नारी शक्ति: सरोधी की चौपाल में केकती बाई ने साझा की बदलाव की गाथा
- कटहल–गुलमोहर की छांव में सजी चौपाल, मुख्यमंत्री ने सरोधी में सुनी जनता की आवाज
- सुशासन की गूंज: वनांचल ग्राम छपरवा से हुआ ‘सुशासन तिहार’ का शंखनाद, पहले ही दिन बरसे लाभ


