शनिवार की पूजा मुख्य रूप से न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है, जिसमें काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द, और काले-नीले वस्त्रों का उपयोग होता है। यह पूजा शनि दोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि पाने के लिए किया जाता है। पूजा विधि में स्नान, दीपक जलाना, मंत्र जाप और हनुमान जी या पीपल वृक्ष की पूजा शामिल है।
शनि देव को कर्मों के अनुसार फल देने वाला देवता माना जाता है। उनकी पूजा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या जैसे शनि दोषों का प्रभाव कम होता है। इससे जीवन में शांति, सुख और स्थिरता आती है और नकारात्मकता दूर होती है।
शनिवार के दिन शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। शनि देव को काले तिल, नीले फूल और काले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। पीपल और शमी के पेड़ की पूजा करने से भी लाभ मिलता है। इस दिन शनि चालीसा का पाठ और हनुमान जी की पूजा करने से डर, बाधा और कष्ट दूर होते हैं।
शनिवार की विशेष पूजा विधि:
स्नान और संकल्प: शनिवार की सुबह स्नान करें। साफ और साधारण वस्त्र पहनें। मन में शनि देव की पूजा का संकल्प लें।
पूजा स्थान: शनि मंदिर जाकर पूजा करें या घर में शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा करें और शनि देव की आरती करें। पूजा के दौरान शनि देव की मूर्ति की आंखों में सीधे न देखें।
दीपक और तेल अर्पण: सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक में काले तिल मिलाना शुभ माना जाता है।
पूजन सामग्री अर्पित करें: शनि देव को सरसों का तेल, नीले या काले फूल, माला और शमी के पत्ते अर्पित करें।
भोग लगाएं: फल और मिठाई का भोग लगाएं। विशेष रूप से पूरी और उड़द दाल की खिचड़ी अर्पित करना शुभ माना जाता है।
दान का महत्व: काले वस्त्र, काले उड़द, लोहे की वस्तु या सरसों का तेल दान करें। दान जरूरतमंदों को करना अधिक फलदायी होता है।
मंत्र जाप और पाठ: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके साथ शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें।
पीपल और शमी की पूजा: पीपल और शमी के वृक्ष पर जल चढ़ाएं। दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ परिक्रमा करें।
हनुमान जी की पूजा: हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। माना जाता है कि हनुमान जी की पूजा से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
शनि देव की ये करें आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव….
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव….
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव….
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव….
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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