नई दिल्ली। गेंदा फूल का उपयोग आयुर्वेद में डॉ. श्यामनंदन तिवारी के अनुसार त्वचा, बाल, संक्रमण और रक्त शुद्धिकरण सहित कई बीमारियों के घरेलू इलाज में किया जाता है।
कई फूल ऐसे होते हैं, जिनमें मनभावन सुगंध और सुंदरता के साथ-साथ अनेक औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। प्राचीन काल में दवाओं का विकास नहीं हुआ था, तब लोग फूलों, पत्तियों और जड़ी-बूटियों के माध्यम से ही बीमारियों का इलाज करते थे। इन्हीं फूलों में एक गेंदा का फूल है, जिसे आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी गेंदा फूल को कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। त्वचा रोगों से लेकर बालों की समस्याओं तक, गेंदा फूल को एक कारगर औषधि माना जाता है। खास बात यह है कि यह फूल आसानी से उपलब्ध होता है और बिना किसी दुष्प्रभाव के घरेलू इलाज में प्रयोग किया जा सकता है।
इस संबंध मेंडॉ. श्यामनंदन तिवारी बताते हैं कि गेंदा के औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। गेंदा फूल में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह के संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। इसी वजह से आयुर्वेदिक दवाओं और लेपों में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है।
उन्होंने बताया कि गेंदा फूल में विटामिन ए, विटामिन बी, कई आवश्यक मिनरल्स और भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा और बालों के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। गेंदा का उपयोग बाल झड़ने की समस्या, स्कैल्प में फंगल संक्रमण, दाद, खाज और खुजली जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों में प्रभावी माना जाता है।
साथ ही बताया कि गेंदा फूल का लेप दाद, खाज और खुजली में सबसे कारगर घरेलू उपायों में से एक है। इसके लिए ताजे गेंदा फूल को अच्छे तरीके से पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से खुजली और जलन में राहत मिलती है। लगातार कुछ दिनों तक इसका प्रयोग करने से त्वचा रोगों में सुधार देखा जाता है।
उन्होंने बताया कि गेंदा फूल का उपयोग केवल बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि आंतरिक रूप से भी किया जाता है। कुछ लोग इसका सेवन रक्त शुद्धिकरण के लिए करते हैं। गेंदा को पीसकर सीमित मात्रा में सेवन करने से खून में मौजूद गंदगी कम होती है, जिससे फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
डॉ. श्याम नंदन तिवारी ने आगे बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग गेंदा फूल का उपयोग आंखों की सूजन, छोटे घाव, जलन और मुंह के छालों में करते हैं। गेंदा के फूल का काढ़ा या लेप इन समस्याओं में लाभकारी साबित होता है।
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