खबर वर्ल्ड न्यूज-दुर्ग। दुर्ग जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) विजय अग्रवाल ने पुलिस विभाग में अनुशासन और ईमानदारी को मजबूत करने के लिए एक और सख्त कदम उठाया है। यातायात विभाग में पदस्थ आरक्षक अर्जुन दुबे को ओवरलोड वाहनों से अवैध रूप से धन वसूलने के गंभीर आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है, और यह संदेश दिया गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। साथ ही, दो अन्य पुलिसकर्मियों को फरियादियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में लाइन अटैच किया गया है। यह घटना पुलिस की छवि सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।मामले का विस्तृत बैकग्राउंड
सूत्रों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरक्षक अर्जुन दुबे दुर्ग के सुपेला सब्जी मंडी क्षेत्र में तैनात थे, जहां वे ट्रकों और छोटे मालवाहक वाहनों को रोककर अवैध वसूली कर रहे थे। प्रत्येक वाहन से ₹200 से लेकर ₹2,000 तक की राशि वसूली जा रही थी, जो ओवरलोडिंग या अन्य छोटे-मोटे उल्लंघनों के नाम पर की जाती थी। इसकी शिकायत स्थानीय व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों द्वारा पहले भी यातायात प्रभारी एएसपी ऋचा मिश्रा को की गई थी। शिकायतों की संख्या बढ़ने पर SSP विजय अग्रवाल ने मामले की गहन जांच का आदेश दिया।
विभागीय जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच अधिकारी एएसपी (ग्रामीण) अभिषेक झा ने बैंक ट्रांजेक्शन, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को प्रमाणित किया। विशेष रूप से, एक ट्रांसपोर्टर दुर्गेश सिन्हा से दुबे ने ₹5,600 की राशि अपने बैंक ऑफ महाराष्ट्र खाते में ट्रांसफर करवाई थी। जांच में पाया गया कि यह राशि एक ट्रक को बिना चालान के जाने देने के बदले ली गई थी। कुल मिलाकर, जांच अवधि (पिछले 3 महीनों) में दुबे द्वारा कम से कम 20-25 वाहनों से अवैध वसूली के प्रमाण पाए गए, जिनकी कुल अनुमानित राशि ₹50,000 से अधिक हो सकती है, हालांकि सटीक आंकड़े जांच रिपोर्ट में ₹200-₹2,000 प्रति वाहन के आधार पर आधारित हैं।
आरक्षक दुबे को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इससे पहले भी उन्हें कर्तव्य में लापरवाही के लिए वेतनवृद्धि रोकने का दंड मिल चुका था। अंततः, पुलिस रेग्यूलेशन पैरा 221 (क) के तहत उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। SSP अग्रवाल ने बताया कि इस पैरा के तहत गंभीर अनुशासनहीनता के मामलों में बर्खास्तगी का प्रावधान है, और यह कार्रवाई विभाग की आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
अन्य पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
इसी क्रम में, स्मृति नगर चौकी में पदस्थ एएसआई प्रमोद सिंह और आरक्षक रवि ठाकुर पर भी गाज गिरी। इन दोनों पर फरियादियों के साथ दुर्व्यवहार और अनुचित व्यवहार के आरोप लगे थे। शिकायतें सीधे SSP कार्यालय तक पहुंचीं, जिसमें कहा गया कि वे शिकायतकर्ताओं को धमकाते थे और मामलों को सुलझाने के बदले पैसे की मांग करते थे। जांच में आरोप सही पाए जाने पर दोनों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया और उन्हें रक्षित केंद्र में पदस्थ किया गया है। SSP ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रारंभिक जांच के बाद आगे की विभागीय कार्यवाही की जाएगी, जिसमें सस्पेंशन या बर्खास्तगी तक शामिल हो सकती है।
SSP का बयान और व्यापक प्रभाव
SSP विजय अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी प्राथमिकता आम जनता की सेवा और सुरक्षा है, न कि व्यक्तिगत लाभ। दुबे के मामले में हमने सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया, और कार्रवाई निष्पक्ष रही।” उन्होंने आगे बताया कि जिले में अवैध वसूली के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 5-6 समान शिकायतें प्राप्त हुई हैं, और जांच जारी है।
यह कार्रवाई दुर्ग पुलिस के लिए एक उदाहरण बनेगी। स्थानीय व्यापारी संघ ने SSP के इस कदम की सराहना की है, और कहा है कि इससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में विश्वास बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पुलिस भ्रष्टाचार के मामलों में 2025 में अब तक 10 से अधिक पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें वसूली से जुड़े मामलों की संख्या प्रमुख है। SSP अग्रवाल का यह कदम राज्य स्तर पर पुलिस सुधारों को मजबूती प्रदान करेगा।


