खबर वर्ल्ड न्यूज- रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नकद मिले, जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश किया। चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को ईडी ने गिरफ्तार किया था और उन्हें 22 जुलाई तक की रिमांड पर भेजा गया है। अब 23 जुलाई को विशेष अदालत में पेशी होगी और ईडी उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग करेगी।
* ईडी की प्रमुख जांच बिंदु और आंकड़े:
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घोटाले की अवधि:
यह शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिसमें प्रदेश के राजस्व को गंभीर नुकसान पहुंचा। -
अवैध कमाई (POC – Proceeds of Crime):
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घोटाले से जुड़े 2500 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय (POC) का पता चला।
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अकेले चैतन्य बघेल को ₹16.70 करोड़ रुपये नकद मिले।
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उन्होंने यह रकम अपनी रियल एस्टेट कंपनियों में ठेकेदारों को नकद भुगतान, फर्जी बैंक एंट्रीज़ और प्रोजेक्ट डेवेलपमेंट में प्रयोग की।
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विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट में लेनदेन:
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चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर 5 करोड़ रुपये की अवैध राशि को फ्लैट बुकिंग के नाम पर सफेद किया।
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ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर बुकिंग की गई और ट्रांजेक्शन को वैध दिखाया गया।
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1000 करोड़ से अधिक की संपत्ति की हेराफेरी:
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ईडी का दावा है कि चैतन्य ने 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि को संचालित किया और इसे कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को ट्रांसफर कराने में समन्वय किया।
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इस रकम को अनवर ढेबर सहित कई अन्य सहयोगियों के माध्यम से इधर-उधर घुमाया गया।
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* ईडी की जांच: किनके खिलाफ कार्रवाई हुई?
अब तक इस घोटाले में कई प्रमुख हस्तियों की गिरफ्तारी हो चुकी है:
| नाम | पद / पहचान | स्थिति |
|---|---|---|
| अनिल टुटेजा | पूर्व आईएएस | गिरफ्तार |
| अरविंद सिंह | सरकारी अफसर | गिरफ्तार |
| त्रिलोक सिंह ढिल्लों | व्यवसायी | गिरफ्तार |
| अनवर ढेबर | शराब सिंडिकेट के मास्टरमाइंड | गिरफ्तार |
| अरुणपति त्रिपाठी | पूर्व आईटीएस अफसर | गिरफ्तार |
| कवासी लखमा | पूर्व मंत्री व विधायक | गिरफ्तार |
* ईडी की प्रेस रिलीज के प्रमुख अंश:
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“चैतन्य बघेल को जो नकद मिला, वह अपराध की आय (POC) है। इसे रियल एस्टेट फर्मों के माध्यम से वैध दिखाने का प्रयास किया गया।“
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“विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट, नकद फ्लैट खरीद, फर्जी नामों का इस्तेमाल – ये सभी मनी लॉन्ड्रिंग की योजनाएं थीं।”
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“शराब सिंडिकेट से मिले पैसे का नेटवर्क, बैंकिंग ट्रेल और एंट्रीज सभी ईडी के पास मौजूद हैं।”


