खबर वर्ल्ड न्यूज – रायपुर। छत्तीसगढ़ और हिंदी कविता जगत के लिए आज का दिन अत्यंत शोकाकुल है। पद्मश्री से सम्मानित और देश-विदेश में अपनी हास्य-व्यंग्य रचनाओं से प्रसिद्धि प्राप्त कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे का आज मरवाही श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए राजनीति, कला, साहित्य और संगीत जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ पहुंचीं। भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, राज्य सरकार के मंत्रिमंडल सदस्य, चर्चित कवि डॉ. कुमार विश्वास, सूफी भजन गायक और पद्मश्री सम्मानित मदन चौहान, कवि सुदीप भोला, गायक-अभिनेता सुनील तिवारी, और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित कई लोग इस भावुक विदाई में मौजूद रहे।
हास्य को बनाया सामाजिक विमर्श का माध्यम
डॉ. सुरेंद्र दुबे ने हास्य और व्यंग्य को केवल मनोरंजन का साधन न मानते हुए सामाजिक चिंतन और आलोचना का औज़ार बनाया। उनके शब्दों में करारा व्यंग्य भी था और करुणा भी। राजनीतिक परिदृश्य से लेकर आम आदमी की पीड़ा तक, उनके मंचीय प्रस्तुतियों में साहसिकता, संवेदना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व साफ झलकता था।
वे न केवल एक कवि थे, बल्कि एक आंदोलन थे – एक ऐसा आंदोलन जिसने व्यंग्य के माध्यम से व्यवस्था की विसंगतियों पर चोट की और जनता को हँसी के साथ सोचने पर भी मजबूर किया।
जीवन भर की उपलब्धियाँ
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भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित
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देशभर के कवि सम्मेलनों में हजारों प्रस्तुतियाँ
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दर्जनों काव्य संग्रहों और मंचीय रिकॉर्डिंग्स के ज़रिए आम जनमानस में लोकप्रियता
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टीवी और रेडियो पर हास्य कवि के रूप में एक अलग पहचान
अंतिम क्षणों में भी जुड़े रहे साहित्य से
बताया जा रहा है कि अपने अंतिम दिनों में भी डॉ. दुबे साहित्य-साधना में लीन रहे। वे आगामी कवि सम्मेलन की तैयारी कर रहे थे, और उनकी डायरी में अंतिम रचना अधूरी छूटी पड़ी है — जैसे शब्दों ने भी उनकी विदाई पर मौन धारण कर लिया हो।
Khabarworld 24, डॉ. सुरेंद्र दुबे को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनके शब्द, उनका हास्य, और उनका चिंतन आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा।
“कवि कभी नहीं मरता, वह अपने शब्दों में अमर हो जाता है।”


