खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। रियासत कालीन बस्तर गोंचा पर्व की तैयारियों में 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज एवं बस्तर गोंचा पर्व समिति जुटा हुआ है।श्रीजगन्नाथ मंदिर के पुजारी याेगेश मंड़न ने बताया देवस्नान चंदन जात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर गोंचा पर्व की शुरुआत 11 जून को हुई थी । देवस्नान चंदन जात्रा पूजा विधान में परंपरानुसार ग्राम आसना से लाकर भगवान शालीग्राम का विधि-विधान के साथ पूजा कर भगवान के विग्रहों को मुक्ति मंडप में स्थापित किया गया था।
याेगेश मंड़न ने बताया श्रीजगन्नाथ मंदिर में 12 जून से जारी भगवान श्रीजगन्नाथ का अनसर काल 25 जून तक जारी रहेगा, इस दाैरान भगवान श्रीजगन्नाथ का दर्शन वर्जित है, लेकिन भगवान श्रीजगन्नाथ की सेवा औषधियुक्त भाेग का अर्पण कर किया जा रहा है, एवं श्रृद्धालुओं काे औषधियुक्त प्रसाद का वितरण किया जा रहा । भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का अनसर काल 25 जून को खत्म हो जाएगा। उन्हाेने बताया कि भगवान श्रीजगन्नाथ का अनसर के दाैरान श्रीजगन्नाथ मंदिर में भगवान शालीग्राम एवं माता महालक्ष्मी की पूजा मंदिर के पुजारियों के द्वारा की जा रही है। उन्हाेने बताया कि 26 जून काे नेत्राेत्सव पूजा विधान में भगवान श्रीजगन्नाथ के र्दशन हाेंगे । 27 जून को श्रीगाेंचा रथ यात्रा पूजा विधान में श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहाें काे रथारूढ़ कर रथ परिक्रमा के साथ जनकपुरी-सिरहासार भवन में 9 दिनाें के लिए श्रृद्धालुओं के दर्शनार्थ स्थपित किथा जायेगा। इस दाैरान भी श्रीजगन्नाथ मंदिर में भगवान शालीग्राम एवं माता महालक्ष्मी की पूजा मंदिर के पुजारियों के द्वारा की जाती रहेगी। बस्तर गोंचा पर्व के तय कार्यक्रम के अनुसार 5 जुलाई काे बाहुड़ा गाेंचा एवं कपाट फेड़ा पूजा विधन के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा श्रीमंदिर में स्थापित हाेने के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ सहित भगवान शालीग्राम एवं माता महालक्ष्मी की भी पूजा हाेगी। उन्हाेने बताया कि तुलसी विवाह पूजा विधान के बाद भगवान शालीग्राम काे आगामी बस्तर गाेंचा पर्व तक उनके धाम ग्राम आसना में स्थापित कर दिया जायेगा।
360 घर आरण्यक ब्राहम्ण समाज के वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र पानीग्राही ने बताया कि तय कार्यक्रम के अनुसार 26 जून काे नेत्राेत्सव पूजा विधान के दूसरे दिन 27 जून को होने वाली रथ यात्रा में तीन रथों पर यह यात्रा निकाली जाएगी। इसमें दो पुराना और एक नया रथ शामिल होगा। 32 फिट ऊंचे नए रथ का निर्माण जारी है। तीन रथों में से नए रथ के लिए कपड़ा आ गया है जिसकी सिलाई करवाई जा रही है। यह काम जल्द पूरा किया जाएगा। वहीं सिरहासार भवन के सामने पंडाल बनाने का कार्य जारी है, सिरहासार भवन को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा।
रथ निर्माण कारीगर हरदेव ने बताया कि ने बताया कि नए रथ तय समय पर तैयार हाे जायेगा। इसके साथ ही पुराने रथ का मेंटनेंस का भी कार्य जारी है।
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