खबर वर्ल्ड न्यूज़ – हेमलता निषाद, दुर्ग l दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक के ग्राम निपानी रोड रानीतराई में संचालित “चक्रधारी फ्लाई एश ब्रिक्स” नामक ईंट फैक्ट्री इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यह वही क्षेत्र है जहाँ सरकार ने पारंपरिक लाल ईंटों के निर्माण पर पर्यावरणीय कारणों से पाबंदी लगाकर फ्लाई एश से बनी काली ईंटों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई योजनाएं चलाईं। इसके तहत ईंट व्यापारियों को लोन, सब्सिडी और अन्य आर्थिक सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि मिट्टी के अंधाधुंध दोहन को रोका जा सके।

इन योजनाओं का लाभ उठाते हुए यह फैक्ट्री वर्षों से संचालित हो रही है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब निर्माण के बाद ईंटों को सुखाने के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण उन्हें मुख्य सड़क के किनारे सूखने के लिए रखा जा रहा है।
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि यह ईंट फैक्ट्री एक अंधे मोड़ के पास स्थित है, जहां न तो स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है और न ही कोई चेतावनी संकेत
लगाए गए हैं। नतीजतन, सड़क पर चलने वाले वाहनों को किनारे सूख रही ईंटें समय रहते दिखाई नहीं देतीं। यह स्थिति दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका लगातार बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन महज कुछ आर्थिक लाभ के लिए राहगीरों की जान को जोखिम में डाल रहा है। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ने जैसा है।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देगा? या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद खुलेगी?


