Khabarworld24.com -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल भारतीय नौसेना के बेड़े में नए युद्धपोतों को औपचारिक रूप से समर्पित करेंगे। इस महत्वपूर्ण समारोह का आयोजन विशाखापत्तनम में किया जाएगा, जहाँ भारतीय नौसेना की ताकत में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। ये नए युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए अहम साबित होंगे।
कार्यक्रम का महत्व:
इस समर्पण कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और समुद्री रणनीतिक सुरक्षा को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा नीतियों में सैन्य आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नौसैनिक युद्धपोतों के बेड़े में नए जहाजों का जुड़ना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
शामिल किए जा रहे युद्धपोत:
इस समारोह में शामिल किए जाने वाले युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित हैं। ये पोत मुख्य रूप से स्वदेशी उत्पादन का हिस्सा हैं और भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की अहम भूमिका रही है। इनमें से प्रमुख युद्धपोत निम्नलिखित हैं:
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आईएनएस मोरमुगाओ (INS Mormugao):
- यह एक प्रोजेक्ट 15बी श्रेणी का स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक है।
- इसकी लंबाई 163 मीटर है और यह 7400 टन वजन उठाने में सक्षम है।
- इसमें ब्रह्मोस और बराक-8 मिसाइलें, अत्याधुनिक सेंसर और रडार सिस्टम लगे हुए हैं।
- यह 56 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकता है।
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आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant):
- भारत में निर्मित पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत।
- 45,000 टन वजनी इस युद्धपोत की लंबाई 262 मीटर है और यह 30 लड़ाकू विमान ले जाने में सक्षम है।
- विक्रांत भारत की नौसैनिक क्षमता को और मजबूती देगा, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में।
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आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri):
- यह एक फ्रिगेट है, जो एंटी-सबमरीन और एंटी-एयर मिशनों के लिए बनाया गया है।
- इसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली है।
भारतीय नौसेना के बेड़े में वृद्धि:
इन नए जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना के पास अब कुल 150 से अधिक युद्धपोत हो जाएंगे। साथ ही, भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास स्वदेशी तकनीक से विकसित विमानवाहक पोत है। इन युद्धपोतों की तकनीकी क्षमताओं और शक्तिशाली हथियार प्रणालियों के कारण भारत की समुद्री ताकत में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
आर्थिक एवं सुरक्षा दृष्टिकोण:
भारत के समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए यह कदम बहुत अहम है, क्योंकि भारत का 90% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए भारतीय नौसेना की ताकत में वृद्धि करना अनिवार्य हो गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” के तहत देश की रक्षा क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया है। भारतीय नौसेना को 2024 तक कुल 170 युद्धपोत और 500 विमान प्राप्त करने का लक्ष्य है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और सामरिक शक्ति और बढ़ेगी।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नौसैनिक युद्धपोतों को समर्पित करने का यह कदम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल भारतीय नौसेना की ताकत में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की वैश्विक स्तर पर सामरिक स्थिति भी मजबूत होगी।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

