khabarworld24.com -भारत की छवि और प्रतिष्ठा पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कारणों से प्रभावित हुई है। वैश्विक मीडिया और विभिन्न संगठनों द्वारा भारत में मानवाधिकारों के हनन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण, और सांप्रदायिक मुद्दों पर आलोचना के कारण देश को विभिन्न प्लेटफार्मों पर नकारात्मक ध्यान मिला है। हालांकि, सरकार ने इन दावों का खंडन करते हुए अपने सुधारों और विकास कार्यों को प्रस्तुत किया है। आइए, इस मुद्दे का गहन अध्ययन करते हैं और इसे आंकड़ों के साथ प्रस्तुत करते हैं।
भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले मुद्दे:
1. मानवाधिकार उल्लंघन:
- संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने हाल के वर्षों में भारत में नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए हैं।
- एक अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट रिपोर्ट (2023) में भारत में सांप्रदायिक हिंसा, पुलिस बर्बरता, और अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभाव पर चिंता जताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 200 से अधिक सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2021 के मुकाबले 10% अधिक थीं।
- ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न कानूनों का दुरुपयोग किया है।
2. मीडिया स्वतंत्रता:
- रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के अनुसार, 2024 में भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग 161वीं हो गई, जो कि 2022 में 150वीं थी।
- रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिंग के कारण धमकाया जा रहा है, उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, और कुछ मामलों में उन्हें जेल भी भेजा गया है।
- कुछ प्रमुख पत्रकार संगठनों ने भी दावा किया कि मीडिया का एक बड़ा हिस्सा दबाव में है और सरकार के खिलाफ बोलने से बच रहा है।
3. अल्पसंख्यकों की स्थिति:
- 2023 के Pew Research Center की एक रिपोर्ट में पाया गया कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों, के खिलाफ सामाजिक भेदभाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में धार्मिक भेदभाव के मामलों में 30% की वृद्धि हुई थी।
- अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने भारत को एक “विशेष चिंता वाला देश” (country of particular concern) के रूप में सूचीबद्ध किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक सहिष्णुता के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल हो रही है।
4. सामाजिक असमानता और जातिवाद:
- भारत में सामाजिक असमानता और जातिवाद की समस्याएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रही हैं। Oxfam की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सबसे धनी 1% लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 40.5% हिस्सा है, जबकि निचले 50% लोगों के पास केवल 3%।
- इसके अलावा, दलित समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और भेदभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय संगठन और देशों ने अपनी चिंता जाहिर की है। 2022 में दलितों पर होने वाले अपराधों में 18% वृद्धि हुई थी।
5. सांप्रदायिक हिंसा और कानून-व्यवस्था:
- भारत में विभिन्न राज्यों में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के कारण भी देश की छवि पर असर पड़ा है। 2023 में, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में बड़े सांप्रदायिक दंगे हुए, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों घायल हुए।
- कुछ संगठनों का मानना है कि सरकार ने इन हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा।
6. नागरिक स्वतंत्रता और डिजिटल निगरानी:
- Freedom House की 2023 की रिपोर्ट में भारत की रेटिंग “Partly Free” के रूप में दी गई। यह रेटिंग सरकार द्वारा इंटरनेट और डिजिटल स्पेस पर बढ़ते नियंत्रण और निगरानी के कारण आई।
- भारत सरकार द्वारा कुछ वेबसाइटों और ऐप्स को प्रतिबंधित करने, साथ ही नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी के लिए तकनीकी उपकरणों के उपयोग को लेकर आलोचना की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया:
भारत सरकार ने बार-बार इन आरोपों का खंडन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य अधिकारियों का कहना है कि देश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में है और आलोचना राजनीतिक प्रेरणाओं के तहत की जा रही है। सरकार का यह भी दावा है कि हाल के सुधारों और नीतियों का उद्देश्य आर्थिक विकास और समाज के हर वर्ग की प्रगति सुनिश्चित करना है।
सरकार के विकास कार्य और सुधार:
- आर्थिक मोर्चे पर, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, 2023-24 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.5% रही, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक थी।
- जन धन योजना, आयुष्मान भारत, और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को लाभान्वित किया गया है।
- डिजिटल इंडिया अभियान और मेक इन इंडिया के माध्यम से भारत ने वैश्विक निवेश आकर्षित करने और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं।
निष्कर्ष:
भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर हाल के वर्षों में अनेक विवादों और मुद्दों का प्रभाव पड़ा है। हालांकि, देश में हो रहे आर्थिक और सामाजिक सुधारों के बावजूद, मानवाधिकारों, धार्मिक सहिष्णुता, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हो रहा है। भारत को इन मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि विश्व में उसकी प्रतिष्ठा बहाल हो सके।
खबर वर्ल्ड24-व्यास पाठक -स्रोत : विभिन्न न्यूज़ आर्टिकल्स

