khabarworld24.com – छत्तीसगढ़, जो दशकों से ‘धान का कटोरा’ के रूप में पहचाना जाता है, ने हाल के वर्षों में एक अभूतपूर्व आर्थिक बदलाव देखा है। राज्य में धान की खेती करने वाले किसान, जो कभी साधारण जीवन व्यतीत करते थे, अब तेजी से सम्पन्न हो रहे हैं। पिछले 7 सालों में धान की कीमतों में वृद्धि और समर्थन मूल्य ने ग्रामीण इलाकों की तस्वीर ही बदल दी है। इस वर्ष, समर्थन मूल्य और अंतर की राशि मिलाकर किसानों के खातों में लगभग 55,000 करोड़ रुपए पहुंचने की उम्मीद है।
7 साल में 2.2 लाख करोड़ की अदायगी
पिछले 7 वर्षों में किसानों के खातों में लगभग सवा 2 लाख करोड़ रुपए जमा किए जा चुके हैं, जो राज्य के दो साल के आम बजट के बराबर है। 2018-19 से किसानों को धान का उचित मूल्य मिलने लगा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुधार देखा गया है। 6 सालों में धान बोने वाले किसानों के खातों में 1.65 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि पहुंच चुकी है।
| वित्तीय वर्ष | किसानों को भुगतान (करोड़ रुपए में) |
|---|---|
| 2018-19 | 20,000 |
| 2019-20 | 21,000 |
| 2020-21 | 22,800 |
| 2021-22 | 26,000 |
| 2022-23 | 30,000 |
धान की बढ़ती मांग और किसानों की संख्या में वृद्धि
धान की बढ़ती मांग और सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य का प्रभाव गाँवों में स्पष्ट देखा जा सकता है। वर्ष 2024 में 27.78 लाख किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचा, जो 2020 के 18.43 लाख किसानों की तुलना में 50% अधिक है। धान की खेती करने वाले किसानों की संख्या में निरंतर वृद्धि इस क्षेत्र में खेती की सफलता को दर्शाती है।
| वर्ष | धान बेचने वाले पंजीकृत किसान (लाखों में) |
|---|---|
| 2020 | 18.43 |
| 2021 | 20.99 |
| 2022 | 24.35 |
| 2023 | 26.47 |
| 2024 | 27.78 |
ट्रैक्टर और आधुनिक मशीनों से सुसज्जित गाँव
धान की ऊंची कीमतों और किसानों की आय में वृद्धि के कारण गाँवों में भारी आर्थिक बदलाव देखने को मिल रहा है। लगभग सभी गाँवों में अब ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेसर, और ट्यूबवेल जैसी आधुनिक मशीनें सामान्य हो गई हैं। जहाँ पहले बैलगाड़ी और भैंसा गाड़ी ही प्रमुख साधन होते थे, वहीं अब सैकड़ों गाँवों में दर्जनों ट्रैक्टर और हार्वेस्टर दौड़ रहे हैं। धान की कटाई और मिजाई के लिए अब आधुनिक उपकरणों का उपयोग हो रहा है, जिससे कृषि कार्य में तेजी आई है।
राज्य की धान खरीदी और भविष्य की संभावनाएं
वर्तमान में, छत्तीसगढ़ में धान खरीदी जोरों पर है, और अब तक 70 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा जा चुका है। सरकार ने इस वर्ष लगभग 145 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। माना जा रहा है कि इस वर्ष किसानों के खातों में लगभग 55,000 करोड़ रुपए की राशि जमा होगी, जो राज्य के कुल बजट का लगभग 40% है। इससे यह स्पष्ट है कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में धान की प्रमुख भूमिका बनी हुई है।
किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार
धान की बढ़ती कीमतों और सरकारी योजनाओं के चलते अब किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहाँ किसानों को अपने घर का खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ता था या जमीन बेचनी पड़ती थी, वहीं अब यह संख्या न्यूनतम हो गई है। किसानों के पास अब पर्याप्त धनराशि होती है, जिससे वे न केवल अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर रहे हैं, बल्कि शादी-ब्याह जैसे बड़े खर्च भी आसानी से उठा पा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन और उसकी खरीदी ने राज्य के ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है। यह साफ है कि आने वाले वर्षों में इस सकारात्मक प्रवृत्ति से प्रदेश के किसानों की सम्पन्नता और भी बढ़ेगी, जिससे राज्य की समग्र आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

