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    Home » अडानी पर लगे धोखाधड़ी के आरोप का पूरा विवरण
    संपादकीय

    अडानी पर लगे धोखाधड़ी के आरोप का पूरा विवरण

    adminBy adminDecember 11, 2024No Comments0 Views
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    खबर वर्ल्ड24- अडानी समूह पर पिछले कुछ सालों में कई तरह के धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं, जिनमें सबसे प्रमुख आरोप 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए थे। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अडानी समूह ने शेयर की कीमतों में हेरफेर, विदेशी फंडिंग में अपारदर्शिता और शेल कंपनियों के माध्यम से अवैध रूप से धन जुटाया। इसके अलावा, अडानी समूह पर कर चोरी और सार्वजनिक संस्थानों के नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगे।

    हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने यह भी आरोप लगाया कि अडानी समूह ने विदेशी संस्थानों के जरिए फर्जी लेन-देन किए और अपने शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया। यह आरोप अडानी की कंपनियों की वैल्यूएशन पर गंभीर प्रश्न उठाते हैं।

    हिंडनबर्ग रिपोर्ट के मुख्य आरोप

    1. शेयर बाजार में हेरफेर (Stock Manipulation)

      • अडानी समूह पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए कृत्रिम तरीके अपनाए।
      • फर्जी शेल कंपनियों के जरिए अडानी ग्रुप के शेयर खरीदे गए ताकि उनकी कीमतें बढ़ाई जा सकें।
    2. धन शोधन (Money Laundering)

      • टैक्स हैवन देशों (जैसे मॉरीशस, सिंगापुर) में बनाई गई कंपनियों के माध्यम से धन शोधन किया गया।
      • समूह की कई विदेशी संस्थाएं वास्तविक व्यापार गतिविधियों में शामिल नहीं थीं और केवल फर्जी निवेश दिखाने के लिए उपयोग की गईं।
    3. बकाया कर्ज (Debt) और जोखिम

      • अडानी समूह पर भारी कर्ज है, जिसे उनकी कंपनियों की असली वित्तीय स्थिति को छुपाते हुए हासिल किया गया।
      • बैंकों से लिया गया कर्ज और उसकी चुकौती क्षमता के बीच बड़ा अंतर है।
    4. ओवरवैल्यूएशन (Overvaluation)

      • अडानी की कंपनियों के शेयर बाजार में वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक मूल्य पर सूचीबद्ध हैं।

    भारत में लगे अन्य आरोप

    अडानी समूह के हाथों में कई पब्लिक सेक्टर की कंपनियों और परियोजनाओं का जाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अडानी को कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में हिस्सा दिलाने के लिए विशेष रियायतें दीं। एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधनों का निजीकरण करते समय अडानी को प्राथमिकता दी गई।

    1. सरकारी नीतियों का दुरुपयोग

      • अडानी समूह पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी नीतियों का फायदा उठाते हुए बंदरगाह, हवाई अड्डे, और बिजली परियोजनाओं में एकाधिकार हासिल किया।
    2. नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर

      • अडानी समूह ने नीलामी प्रक्रियाओं में अनुचित लाभ लिया।
      • 6 प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन बिना प्रतिस्पर्धा के अडानी समूह को दिया गया।
    3. पावर सेक्टर में अनुचित लाभ

      • ऊर्जा क्षेत्र में कोयले की खरीद और वितरण में सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग।
    4. विदेशी संबंध और मानवाधिकार उल्लंघन

      • म्यांमार में सैन्य सरकार से जुड़े विवादास्पद सौदों में अडानी समूह का नाम सामने आया है।

    अडानी की संपत्ति और आय में बढ़ोतरी (2014-2024)

    गौतम अडानी की संपत्ति में 2014 से 2024 के बीच उल्लेखनीय और तेजी से वृद्धि हुई है, जो अडानी समूह की व्यापक विस्तार योजनाओं और कई सरकारी अनुबंधों के कारण संभव हुई।

    1. 2014 में अडानी की संपत्ति:

    • 2014 में गौतम अडानी की कुल संपत्ति लगभग $7.1 बिलियन थी। उस समय अडानी समूह मुख्य रूप से बिजली उत्पादन, बंदरगाह संचालन, और खनन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय था। यह अवधि भारतीय राजनीति में बड़े बदलावों का समय था, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और आर्थिक सुधारों और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी देने का वादा किया गया।

    2. 2024 में अडानी की अनुमानित संपत्ति:

    • 2024 में अडानी की संपत्ति $125 बिलियन से अधिक अनुमानित है। यह वृद्धि अद्वितीय है और इसे मुख्य रूप से अडानी समूह की विभिन्न सरकारी परियोजनाओं में बढ़ती भागीदारी और कई महत्वपूर्ण सेक्टरों में उनके निवेश का परिणाम माना जाता है। अडानी समूह ने बिजली उत्पादन, अक्षय ऊर्जा, परिवहन, और हवाई अड्डों के संचालन जैसे क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को और मजबूत किया।

    3. वृद्धि के प्रमुख कारक:

    • इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स: अडानी समूह को कई महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का ठेका मिला, जिनमें बंदरगाह, हवाई अड्डे, और सड़क निर्माण शामिल हैं। इन परियोजनाओं ने अडानी की संपत्ति को तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • बिजली उत्पादन और अक्षय ऊर्जा: पारंपरिक और अक्षय ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में अडानी समूह ने बड़ा निवेश किया। विशेष रूप से, सौर ऊर्जा और बिजली वितरण क्षेत्रों में अडानी की बढ़ती उपस्थिति ने उनकी आय में जबरदस्त इजाफा किया।
    • निजीकरण और सरकारी अनुबंध: सरकार द्वारा पब्लिक सेक्टर की कुछ कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया में अडानी समूह ने प्रमुख भूमिका निभाई। इन सरकारी अनुबंधों और निवेशों ने उनके कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
    • बंदरगाह और हवाई अड्डों का विस्तार: अडानी समूह ने भारत के कई महत्वपूर्ण बंदरगाहों और हवाई अड्डों का संचालन किया। इसके साथ ही, समूह ने विदेशों में भी निवेश किया, जिससे उनकी संपत्ति में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वृद्धि हुई।

    4. आलोचना और विवाद:

    अडानी की संपत्ति में इस असाधारण वृद्धि को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखे विवाद रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार के नीतिगत फैसलों और निजीकरण योजनाओं ने अडानी समूह को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया। कई सरकारी परियोजनाओं में अडानी को प्राथमिकता दी गई, जिससे उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ी।

    2014-2024 के बीच संपत्ति में वृद्धि

    • 2014 में अडानी की कुल संपत्ति: $7.1 बिलियन
    • 2024 में अनुमानित संपत्ति: $125 बिलियन

    मुख्य कारण

    1. सार्वजनिक परियोजनाओं में बढ़ती भागीदारी।
    2. सरकारी नीतियों का समर्थन।
    3. अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में निवेश।

     

    सरकार और अडानी ग्रुप की कथित मिलीभगत

    • अडानी समूह पर सरकार से विशेष लाभ प्राप्त करने और नीतियों को प्रभावित करने का आरोप है।
    • सरकारी परियोजनाओं में अडानी ग्रुप की प्राथमिकता को लेकर विपक्ष ने बार-बार सवाल उठाए।

    अन्य देशों में अडानी के फ्रॉड के आरोप

    अडानी समूह ने अन्य देशों में भी विस्तार किया, लेकिन इन देशों में भी उन पर भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे। ऑस्ट्रेलिया में अडानी की कारमाइकल कोयला खदान परियोजना को पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, श्रीलंका में अडानी समूह द्वारा एक बंदरगाह के अधिग्रहण के समय भी पारदर्शिता और प्रतियोगिता संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए थे।

    विदेशों में अडानी के फ्रॉड

    • ऑस्ट्रेलिया में विवाद: कारमाइकल कोयला परियोजना को लेकर पर्यावरणीय और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगे।
    • म्यांमार में सैन्य संपर्क: अडानी समूह पर आरोप है कि उन्होंने म्यांमार की सेना के साथ साझेदारी की, जो मानवाधिकार हनन में लिप्त थी।

    भारत सरकार का अडानी का बचाव

    अडानी समूह पर लगे आरोपों के बावजूद, भारत सरकार पर यह आरोप है कि उसने सीधे या परोक्ष रूप से अडानी की कंपनियों को समर्थन दिया। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अडानी समूह ने कई सरकारी परियोजनाओं के ठेके प्राप्त किए और बंदरगाहों, हवाईअड्डों, कोयला खदानों और बिजली संयंत्रों जैसे क्षेत्रों में अडानी को प्रमुख ठेके मिले। 

    अडानी के विस्तार को लेकर सरकार पर भी आरोप है कि कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण करते समय अडानी को विशेष लाभ दिया गया। आलोचकों का दावा है कि ये निर्णय सरकार और अडानी समूह के बीच आपसी हितों की वजह से हुए। 

    सार्वजनिक क्षेत्र के अधिग्रहण और मिलीभगत

    पब्लिक सेक्टर का निजीकरण

    • अडानी समूह ने भारतीय तेल निगम (IOC), एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), और NTPC जैसे पब्लिक सेक्टर संगठनों के बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल किए।
    • नीतिगत निर्णयों में बदलाव कर अडानी को अनुचित लाभ दिया गया।

    मिलीभगत के सबूत

    • सार्वजनिक निविदाओं (tenders) में कम प्रतिस्पर्धा और अडानी की जीत के मामलों की गहन जांच की जरूरत है।
    • विपक्षी दलों ने संसद में इन मुद्दों को कई बार उठाया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

     

    सरकार और विपक्ष की भूमिका

    जहां एक ओर अडानी के साथ सरकार के संबंधों को लेकर कई सवाल उठाए जाते हैं, वहीं विपक्ष ने इन मुद्दों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर कई बार उठाया। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अडानी समूह का समर्थन करती है और उसे अनुचित लाभ पहुंचाती है।

    कई बार विपक्ष ने अडानी समूह को दी गई सरकारी परियोजनाओं पर पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया। इसके अलावा, 2024 के लोकसभा चुनावों में भी यह मुद्दा विपक्ष के अभियान का एक मुख्य हिस्सा बन सकता है।

    सरकार का समर्थन

    • नीतियों का निर्माण ऐसा रहा जिससे अडानी समूह को फायदा हो।
    • जांच में तेजी न लाना और मुद्दों को टालना।

    विपक्ष का योगदान

    • विपक्षी दलों ने अडानी मुद्दे को कई बार संसद में उठाया।
    • हाल ही में “जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी” (JPC) की मांग की गई है।

    गौतम अडानी और अडानी समूह पर लगे धोखाधड़ी के आरोपों के जवाब में, अडानी समूह ने कई बार अपनी स्थिति स्पष्ट की है। 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद, अडानी समूह ने इन आरोपों का पुरजोर खंडन किया और इसे “झूठा” और “बेहद दुर्भावनापूर्ण” करार दिया।

    अडानी समूह का प्रमुख बयान:

    1. सभी आरोप निराधार: अडानी समूह ने कहा कि हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे, तथ्यहीन और निराधार हैं। समूह ने दावा किया कि इन आरोपों का उद्देश्य केवल उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना और उनकी छवि को धूमिल करना था। उन्होंने रिपोर्ट को “भारत पर एक सुनियोजित हमला” बताया।

    2. लेन-देन पारदर्शी: अडानी समूह ने यह भी कहा कि उनके सभी वित्तीय लेन-देन पूरी तरह से कानूनी हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी वित्तीय गतिविधियों और निवेश के लिए उचित नियम और कानून का पालन किया गया है। समूह ने यह भी कहा कि उनके ऑडिट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा किए जाते हैं।

    3. विदेशी निवेश और शेल कंपनियों का मुद्दा: आरोप था कि अडानी समूह ने शेल कंपनियों के माध्यम से विदेशी निवेश का गलत इस्तेमाल किया। इस पर अडानी समूह ने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया और उनके सभी विदेशी निवेश नियमों के तहत वैध रूप से संचालित किए जाते हैं।

    4. निष्पक्ष जांच की मांग: अडानी समूह ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि इन दावों की सच्चाई सामने आ सके। समूह ने कहा कि उनकी कंपनी हमेशा नियामक संस्थाओं के साथ सहयोग करती है और पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन करती है।

    5. आर्थिक नुकसान: अडानी समूह ने यह भी दावा किया कि इन आरोपों के कारण समूह के निवेशकों और शेयरधारकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। समूह ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने उनके बाजार मूल्य को गिराने के लिए गलत तथ्यों का सहारा लिया।

      अडानी समूह ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें बदनाम करने की साजिश बताया है और कहा कि उनके व्यवसाय और वित्तीय गतिविधियां पूरी तरह से कानूनी हैं।

    निष्कर्ष 

    गौतम अडानी और अडानी समूह पर लगे आरोप और उनकी संपत्ति में भारी वृद्धि भारत में पूंजीवाद और राजनीति के गठजोड़ को उजागर करते हैं। विपक्ष की मांग है कि अडानी समूह और सरकार के बीच के संबंधों की निष्पक्ष जांच हो।

    सरकार को पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जनता के हित में निर्णय लेने की जरूरत है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह भारत के आर्थिक और राजनीतिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाएगा।

     

     

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