khabarworld24.com – भारत में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में लोग देश छोड़कर दूसरे देशों में बस रहे हैं। इसका मुख्य कारण बेहतर नौकरी के अवसर, जीवन की उच्च गुणवत्ता, और बच्चों की शिक्षा जैसे व्यक्तिगत कारण हैं। कई लोग बेहतर आर्थिक स्थितियों और करियर विकास के लिए विदेशों का रुख करते हैं।
पिछले पांच सालों के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में लगभग 2.16 लाख लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी, जबकि 2022 में यह संख्या 2.25 लाख थी। इस अवधि के दौरान कुल मिलाकर लगभग 8 लाख से अधिक भारतीयों ने नागरिकता त्यागी। 2021 और 2022 में, अमेरिका, कनाडा, और ब्रिटेन सबसे पसंदीदा गंतव्य रहे हैं। 2022 में 1.25 लाख भारतीयों ने अमेरिका को चुना, जबकि 1.18 लाख लोग कनाडा और 1.12 लाख ब्रिटेन चले गए
भारत के लोग देश छोड़कर अन्य देशों में बसने के कई कारणों से प्रेरित होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यह पलायन दर बढ़ती जा रही है, और इसमें कई आर्थिक, सामाजिक, और व्यक्तिगत कारक प्रमुख रूप से शामिल हैं। यहां इस प्रवृत्ति का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
मुख्य कारण
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बेहतर आर्थिक अवसर:
उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय युवाओं के लिए देश के बाहर बेहतर रोजगार के अवसर मिलते हैं। विशेषकर, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, और मेडिसिन के क्षेत्र में अमेरिका, यूरोप, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में उच्च वेतन और करियर ग्रोथ के अवसर ज्यादा होते हैं -
जीवन की गुणवत्ता:
कई भारतीय विदेशों में बेहतर जीवनशैली की तलाश में जाते हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का स्तर भारत के मुकाबले बेहतर होता है। विकसित देशों में रहने की सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा और उच्च मानवीय विकास सूचकांक इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं।
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बच्चों की शिक्षा:
भारतीय परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें विदेश में शिक्षा दिलाने की कोशिश करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, अक्सर वे परिवार के साथ स्थायी रूप से उन देशों में बस जाते हैं, जहां शिक्षा प्रणाली और भविष्य के रोजगार अवसर अच्छे होते हैं। -
नागरिकता के फायदे:
कई भारतीय लोग जिन देशों में बसते हैं, वे वहां की नागरिकता भी प्राप्त कर लेते हैं। भारतीय संविधान के तहत, वे दोहरी नागरिकता नहीं रख सकते, इसलिए उन्हें भारतीय नागरिकता छोड़नी पड़ती है -
कर और वित्तीय लाभ:
धनी भारतीय नागरिक भी कर लाभ और संपत्ति सुरक्षा के लिए विदेश में बसते हैं। हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2023 के अनुसार, 2023 में लगभग 6,500 करोड़पति भारत छोड़कर गए, जो मुख्य रूप से टैक्स और निवेश के लिए अधिक अनुकूल देश तलाश रहे थे।
पिछले पांच वर्षों का आंकड़ा
पिछले पांच सालों में लाखों भारतीयों ने अन्य देशों की नागरिकता अपनाई है:
- 2019: 1,44,017 लोगों ने नागरिकता छोड़ी।
- 2020: 85,256 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी, जो कोविड महामारी के कारण कम रहा।
- 2021: 1,63,370 लोगों ने नागरिकता छोड़ी।
- 2022: 2,25,620 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी।
- 2023: 2,16,219 लोग विदेशों में बसने के लिए भारतीय नागरिकता छोड़ चुके हैं
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अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, और ब्रिटेन भारतीयों के प्रमुख गंतव्य बने हुए हैं। अमेरिका में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक बढ़ रही है, और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया और कनाडा का स्थान है
भारत से लोगों का पलायन मुख्य रूप से आर्थिक कारणों, बेहतर जीवनशैली, और बच्चों के भविष्य के प्रति चिंताओं से प्रेरित है। भारतीय प्रतिभाओं का पलायन न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए है, बल्कि कई बार यह देश के लिए “ब्रेन ड्रेन” की समस्या भी पैदा करता है। हालांकि, प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस और उनके वैश्विक प्रभाव से भारत को भी लाभ होता है।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

