*मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ वनांचलों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, जिला अस्पताल में दो माह के उपचार से स्वस्थ हुआ गंभीर नवजात*
*गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने पेश की संवेदनशीलता और समर्पण की मिसाल, 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हुआ शिशु का वजन*
खबर वर्ल्ड न्यूज़ – रायपुर l छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे महज 900 ग्राम वजन के एक नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग दो माह तक लगातार उपचार एवं विशेष देखभाल प्रदान कर नया जीवन दिया है। अत्यंत कम वजन, समय से पूर्व जन्म, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे इस नवजात की सफल चिकित्सा ने जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता और चिकित्सकीय टीम के समर्पण को रेखांकित किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जिला चिकित्सालयों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात का सफल उपचार इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
*महज 900 ग्राम वजन के साथ जिंदगी की जंग लड़ रहा था नवजात*
गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पूर्व हुआ था। जन्म के बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। इसके साथ ही उसे श्वसन संबंधी परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या भी थी। इतनी कम उम्र और अत्यंत कम वजन के कारण शिशु को विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। नवजात के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई और उसकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार एवं पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई।
*दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया*
उपचार के दौरान नवजात को सांस लेने में हो रही परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। गंभीर एनीमिया की स्थिति में दो यूनिट रक्त ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। इसके अतिरिक्त शिशु के शारीरिक तापमान को संतुलित रखने, पोषण सुनिश्चित करने और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी), नियमित फीडिंग तथा अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी एवं लगभग दो माह के उपचार से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए और शिशु का वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर 8 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
*दूरस्थ वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना जीवनरक्षक सहारा*
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे वनांचल बहुल जिले में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का जिला स्तर पर सफल उपचार होना विशेष महत्व रखता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं और आवश्यक उपचार सुविधाओं के माध्यम से नवजात के स्वास्थ्य में सुधार संभव हो सका। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जिला स्तर पर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर*
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा जरूरतमंद नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेष रूप से नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए जिला चिकित्सालयों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में नवजात शिशु का सफल उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित करती है।
इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता, मरीजों की सतत निगरानी तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
*चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से मिली सफलता*
नवजात शिशु के सफल उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम सहित एसएनसीयू के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लगभग दो माह तक शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी, आवश्यक उपचार, पोषण प्रबंधन और विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई। चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयासों और समर्पित सेवाओं से गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार संभव हुआ।
*नवजात की मुस्कान बनी शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की सार्थकता का प्रतीक*
मात्र 900 ग्राम वजन के साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। यह सफलता न केवल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को दर्शाती है, बल्कि शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध नवजात देखभाल सुविधाओं के महत्व को भी सामने लाती है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रेरक उदाहरण है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में जारी प्रयासों के बीच इस नवजात को मिला नया जीवन शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था की सार्थकता और मानवीय संवेदनशीलता की एक उल्लेखनीय कहानी बनकर सामने आया है।


