हिंदू धर्म में होने वाले सभी धार्मिक पर्वों का अपना-अपना महत्व बताया गया है। साल में होने वाली सभी 24 एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। एकादशी तिथि के दिन विष्णु भगवान की पूजा अर्चना, पूजा पाठ, स्तोत्र आदि का पाठ करने का विधान बताया गया है। ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष में होने वाली एकादशी का सबसे अधिक महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में निर्जला एकादशी के व्रत का आगमन होता है। जिससे सभी पाप नष्ट होने के साथ सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता हैं। निर्जला एकादशी का व्रत सभी 24 एकादशी में सबसे कठिन होती है। यह व्रत शास्त्रों में बताई गई विधि अनुसार करने पर ही लाभ की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी के व्रत को लेकर के ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि साल में होने वाले सभी 24 एकादशी में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन और विशेष फल प्रदान करने वाला होता है। निर्जला यानी बिना पानी पीएं इस व्रत को किया जाता है, जिस कारण यह एकादशी सबसे कठिन होती है। निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से साधकों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मरणो उपरांत यम दंड से मुक्ति मिलने की धार्मिक मान्यता है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से एकादशी का फल प्राप्त हो जाता है।
इस उपाय से करें व्रत
वह आगे बताते हैं कि निर्जला एकादशी का व्रत बेहद ही खास और कई लाभ देने वाला है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से एक दिन पूर्व से ही तामसिक वस्तुएं, अन्न आदि का सेवन करना वर्जित होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके निर्जला एकादशी व्रत को करने का संकल्प करें। इसके बाद विष्णु भगवान की पूजा अर्चना, पूजा पाठ, आराधना, स्तोत्र आदि का पाठ करें। दिन भर विष्णु भगवान के मंत्रो का जाप करने और धार्मिक अनुष्ठान करने पर निर्जला एकादशी का कई गुना फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी का व्रत को विधि विधान से करने पर सभी एकादशियों का फल प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है। यह व्रत 6 जून को विधि विधान से करने पर जहां भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तो धन की देवी मां लक्ष्मी भी अपनी कृपा बनाए रखती हैं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है। किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है। ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है। बताई गई किसी भी बात का K.W.N.S. व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है।
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