रुद्राष्टकम् के पाठ से शत्रु पर आसानी से विजय पाई जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीरामचरितमानस में वर्णन आता है कि भगवान श्री रामचंद्र ने त्रिलोक विजेता रावण से युद्ध करने से पहले रामेशवरम् में रुद्राष्टकम् गाकर भगवान शिव की स्तुति की थी। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव की कृपा से भगवान श्रीराम ने रावण को पराजित कर दिया था।
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए सोमवार को लयबद्ध रूप से रुद्राष्टकम् का पाठ करने से आपको सभी रोगों, शत्रु और दुख-दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। यदि आपको शत्रु पर विजय प्राप्त करनी है तो लगातार 7 दिन तक आपको शिव मंदिर जाकर रुद्राष्टकम् का पाठ करना चाहिए। रूद्राष्टकम् का पाठ आप में ऊर्जा और शक्ति का संचार करता है तथा मन को एकाग्रचित्त बनाता है। जिससे आपके जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा दूर होती है और आपको सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है।
भगवान शिव का रुद्राष्टकम्:
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥1॥
निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥2॥
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥3॥
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥4॥
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ॥
त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥5॥
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥6॥
न यावद् उमानाथपादारविन्दं । भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥7॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ॥
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥8॥
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ॥।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥9॥
भगवान शिव के रुद्राष्टकम् का पाठ करने से आपको जीवन में हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। और यह शिव रुद्राष्टकम् आपको शत्रु का नाश करने में भी मदद करता है।
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