नवरात्र का पर्व बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है। इस महापर्व का दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। यह दिन अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है।
अगर आप माता रानी की पूजा में किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं चाहते हैं, तो आपको पूजा से जुड़ी संपूर्ण बातों को पहले ही जान लेना चाहिए, जो इस प्रकार हैं।
मां ब्रह्मचारिणी भोग
* चीनी या पंचामृत और घर पर बनी गुड़ की मिठाई का भोग लगाएं।
मां ब्रह्मचारिणी फूल
*पीले रंग के फूल अर्पित करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
* सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
* साफ कपड़े धारण करें और मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
* सफेद मोगरा के फूल चढ़ाएं, श्रृंगार की सामग्री, लाल कुमकुम का तिलक लगाएं।
* सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
* देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
* शाम के समय भी मां की विधिवत पूजा करें और आरती से पूजा को पूर्ण करें।
* पूजा करने के बाद अपने व्रत का पारण करें।
मां ब्रह्मचारिणी पूजन मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
मां ब्रह्मचारिणी पूजन समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। फिर विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 38 मिनट से 05 बजकर 27 मिनट तक था। इस दौरान आप माता रानी की खास पूजा कर सकते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। K.W.N.S. यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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