खरमास का आरंभ 15 दिसंबर से हो चुका है। जब भी सूर्यदेव देव गुरु बृहस्पति की राशि राशि धनु या मीन में गोचर करते हैं तो खरमास का आरंभ होता है। खरमास का महीना पूरे 30 दिन का होता है। सूर्य के मकर राशि में जाने पर यानी मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को खरमास का महीना समाप्त हो जाएगा। अब सूर्य के धनु राशि में गोचर करने से खरमास का आरंभ हुआ है। खरमास में सूर्यदेव की चाल धीमी हो जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं खरमास में क्या काम करने चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए। जानें खरमास के नियम।
खरमास में न करें ये काम
खरमास में भगवान सूर्यदेव की गति धीमी हो जाती है। भगवान सूर्य अपना तेज भी कम कर लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
1) खरमास में कभी भी विवाह, सगाई, मुंडन, ग्रह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान विवाह करने से व्यक्ति को वैवाहिक सुख की प्राप्ति नहीं हो पाती है।
2) इसी के साथ इस दौरान नए घर में गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो घर परिवार में अशांति बनी रहती है।
3) इसके अलावा व्यक्ति को खरमास में जनेऊ, मुंडन जैसा मांगलिक कार्य भी नहीं करने चाहिए। इसी के साथ इस महीने में किसी भी नए कार्य की शुरुआत भी न करें।
खरमास में क्या करें
1) खरमास में जितना हे सके भगवान सूर्यदेव की उपासना करें।
2) इस महीने में जितना हो सके धर्म कर्म और दान पुण्य के कार्य करने चाहिए। इस महीने में किसी तीर्थ स्थान की यात्रा करना बेहद शुभ माना जाता है।
3) इस महीने भागवत, रामायण, सत्यनारायण कथा, गीता का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

