भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर हरछठ व्रत किया जाता है। इस पर्व को हलछठ, बलदेव छठ, तिनछठी और चंदन छठ आदि के नाम से भी जाना जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही संतान-सुख की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। चलिए जानते हैं हरछठ की डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
हरछठ 2024 डेट और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी की शुरुआत 24 अगस्त को सुबह 07 बजकर 51 मिनट पर शुरू हो गई है। वहीं, इस तिथि का समापन 25 अगस्त को सुबह 05 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में आज यानी 24 अगस्त को हरछठ का पर्व मनाया जा रहा है।
हरछठ पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवताओं के ध्यान से करें।
स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें।
चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की प्रतिमा को विराजमान करें।
अब प्रभु को चंदन लगाएं और फूलमाला पहनाएं।
देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जप करें।
बलरामजी का शस्त्र हल है। ऐसे में उनकी प्रतिमा पर एक छोटा हल रखकर पूजा करें।
इसके पश्चात प्रभु को फल, मिठाई और खीर समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी से जीवन में सुख-शांति की कामना करें।
हरछठ का महत्व
धार्मिक मत है कि जो साधक इस व्रत को करता है, उसे संतान-सुख की प्रति होती है और संतान को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसा करने से परिवार पर भगवान श्री कृष्ण और बलराम की कृपा सदैव बनी रहती है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। K.W.N.S. यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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