खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-नारायणपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर नक्सलियों के सुरक्षित पनाहगाह कहा जाने वाला ग्राम कुतुल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पहले से पगडंडी और खराब सडक़ों की चुनौतियों के साथ ही जंगली जानवर घने जंगलों के बीच सुनसान सडक़ों पर जगह-जगह नक्सल नारे व बैनर-पोस्टर यह प्रमाणित करने के लिए काफी है कि आज भी यहां नक्सलियों का पूरा नियंत्रण है। जिले के ग्राम कुतुल के साथ ही कई गांव आज भी नक्सली दहशत के चलते मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यहां नक्सल दहशत के चलते प्रशासनिक अमला नहीं पहुंचता है, इसकी तस्दीक ग्राम कुतुल के प्रवेश द्वार मेंं मौजूद नक्सली स्मारक, भवनों पर लिखे नक्सली नारे और नक्सली बैनर-पोस्टर करते हैं।
अबूझमाड़ के ग्राम कुतुल के प्रवेश द्वार मेंं सडक़ के दोनों ओर नक्सल स्मारक बीच में नक्सल बैनर व आस-पास काफी संख्या में पोस्टर, बैनर बंधे हुए हैं। इतना ही नहीं कुतुल जाने की सडक़ों पर स्कूल आंगनबाडिय़ों व उप स्वास्थ्य केन्द्रों में भी नक्सली नारे लिखे हुए हैं। ग्राम कुतुल के शासकीय भवनों के साथ ही रामकृष्ण मिशन आश्रम के दीवारों पर भी नक्सल नारे लिखे हुए हैं, जिसे मिटाने का साहस भी कोई नही करता है। रामकृष्ण मिशन आश्रम इस इलाके के बच्चों को आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाकर बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहा है, इसे बड़ी उपलब्धि या अंधेरे में एक दीपक कहा जा सकता है।
ग्राम कुतुल में शुक्रवार साप्ताहिक बाजार के दिन ग्रामीण एकत्रित होकर रैली निकालकर बाजार में तंबाकू, गुड़ाखू, शराब समेत सभी नशीले पदार्थों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाने का नारा लगाते देखे गये, वहीं बाजार में आये व्यापारियों के साथ बैठककर ग्रामीणों द्वारा विक्रय करने के लिए लाये गये वनोंपज को एमएसपी पर खरीदने कहा गया, साथ ही व्यापारियों को तौल के समय वजन कम होने का हवाला देकर कम कीमत देकर अनपढ़ ग्रामीणों के साथ छलावा नही करने की बात कही गई। ग्रामीणों की उक्त रैली को नक्सली फरमान माना जाता है, क्योकि यहां बगैर नक्सलियों के आदेश के ग्रामीण कुछ भी नही कर सकते हैं।

