खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर के आदिवासी समुदाय अपनी परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए जाग उठे हैं। समाज को बाहर से आये लोगों के बारे में पता चल गया है, अब वे उनकी साजिश का पर्दाफाश कर रहे हैं और मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। उनका मु य एजेंडा आदिवासियों का धर्मांतरण करना है,
लेकिन आदिवासी इस मकडज़ाल को समझ चुके हैं। हमारी संस्कृति और परंपरा ही असली जड़ है, हमें इससे जुड़े
रहना है।
वनमंत्री श्री कश्यप ने कहा कि हमारी विरासत, हमारी आदिवासी परंपरा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है। हमें बाहर से आये लोगों के द्वारा संस्कृति को समझने की आवश्यकता नहीं है। जब तक जड़ से जुड़े रहेंगे, तब तक मजबूत वटवृक्ष की भांति टिके रहेंगे। हमारी संस्कृति पर हमला करने वाले बाहरी तत्वों से सावधान रहना है। समाज को तोडऩे वाले शक्तियों के हर षड्यंत्र को समझकर अपनों के लिए कार्य करनाहै। उन्होने कहा कि हम लोग प्रकृति के उपासक हैं। हमारे जीवन शैली को हिन्दू संस्कृति का आधार माना जाता है। खेतों में फसल उगाने से लेकर काटने तक, सभी कार्यों में देवताओं और पूर्वजों का आह्वान किया जाता है। बस्तर का दशहरा, मौली मेला, माई दंतेश्वरी का मंदिर यहां की संस्कृति विश्व प्रसिद्ध है। ऐसे क्षेत्र का मुझे प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह मेरे लिए गौरव का क्षण है।
केदार कश्यप ने कार्यक्रम में स िमलित लोगों से कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हम आगे बढ़े हैं। हमारे बस्तर क्षेत्र के लोग हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उसी तरह हमारी यह सामाजिक जि मेदारी है कि हम सभी अपने संस्कृति और परंपराओं को लेकर सजग रहें। बाहरी विचारों और लोगों से प्रभावित हुए बिना हम अपने संस्कृति में बने रहें। उन्होंने कहा कि आदिवासी परंपरा और हमारे चीर पुरातन संस्कृति की रक्षा के लिए आया के गुहार मां दंतेश्वरी के द्वार यात्रा का आयोजन सराहनीय पहल है। जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में स िमलित होकर अपनों के बीच गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने यात्रा में शामिल लोगों को शुभकामनाएं भी दी।

