khbarworld24-नई दिल्ली। सोमवार को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने वक्फ अधिनियम में 14 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी, जिनमें विपक्ष के सभी 44 प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया। यह संशोधन विधेयक पिछले साल अगस्त में पेश किया गया था, और इसके लिए भाजपा के जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता में जेपीसी का गठन किया गया था। जेपीसी ने 31 जनवरी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा करने की योजना बनाई है, और यह रिपोर्ट बजट सत्र के दौरान पेश होने की संभावना है।
संशोधन विधेयक में प्रस्तावित बदलाव
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सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में अपील का अधिकार:
जमीन पर दावा करने वाले व्यक्ति को अब सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार मिलेगा, जबकि पहले यह अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल तक सीमित था। -
वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील का प्रावधान:
वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी, जिससे न्यायपालिका तक पहुंच का दायरा बढ़ेगा। -
वक्फ की संपत्ति का दान और अधिकार:
जब तक संपत्ति दान नहीं की जाती, तब तक वह वक्फ की नहीं मानी जाएगी। यह प्रस्ताव वक्फ संपत्तियों के अधिकारों को स्पष्ट करने का प्रयास है। -
वक्फ बोर्ड में महिलाओं और अन्य धर्मों के प्रतिनिधित्व का प्रावधान:
वक्फ बोर्ड में अब दो महिलाओं और दो अन्य धर्मों के व्यक्तियों को सदस्य बनाए जाने की बात की गई है, जबकि पहले महिलाएं और अन्य धर्मों के लोग बोर्ड से बाहर थे।
विपक्ष का विरोध
विपक्षी सांसदों ने इस संशोधन विधेयक पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने की कोशिश है और इसे तानाशाही तरीके से पारित किया जा रहा है। विपक्ष का यह भी कहना है कि जेपीसी ने विपक्षी प्रस्तावों को जानबूझकर खारिज किया है, जो किसी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सनातन हिंदू बोर्ड बनाने की मांग
महाकुंभ के दौरान संतों के एक वर्ग ने वक्फ बोर्ड की तर्ज पर सनातन हिंदू बोर्ड बनाने की मांग की। इस प्रस्ताव में 200 मंदिरों का प्रशासन-प्रबंधन इस नए बोर्ड को सौंपने का प्रस्ताव था। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने धर्म संसद में कहा कि इस प्रस्ताव पर धार्मिक नेताओं की सहमति के बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा।
धर्म संसद में यह मुद्दा उठाया गया कि पहले वक्फ बोर्ड को भंग करना ज्यादा जरूरी है, इससे पहले अखाड़ा परिषद ने इस आयोजन से दूरी बना ली थी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वक्फ बोर्ड को खत्म करना सनातन हिंदू बोर्ड से ज्यादा आवश्यक है।
निष्कर्ष
वक्फ संशोधन विधेयक में किए गए प्रस्तावों के चलते वक्फ बोर्ड के कार्यों और अधिकारों में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। वहीं, सनातन हिंदू बोर्ड बनाने की मांग भी एक नई दिशा की ओर इशारा करती है, जो धार्मिक समुदायों के प्रबंधन और अधिकारों से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है।
इस तरह के प्रस्तावों और विधेयकों पर संसद में होने वाली बहस और आम जनता की प्रतिक्रिया आने वाले समय में राजनीति और समाज में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
Balkrishna sahu Raipur

