Khabarworld24.com -नई दिल्ली। नीट-यूजी 2025 परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने छात्रों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा के फॉर्मेट में संशोधन किया है। पहले जहां परीक्षार्थियों को दो हिस्सों में विभाजित प्रश्नपत्र मिलता था, जिसमें कुछ वैकल्पिक प्रश्न होते थे, वहीं अब नए पैटर्न के अनुसार छात्रों को 180 अनिवार्य प्रश्नों का उत्तर देना होगा। इस नई प्रणाली के तहत छात्रों को 3 घंटे (180 मिनट) का समय प्रदान किया जाएगा।
पहले का पैटर्न:
- सेक्शन A: 35 अनिवार्य प्रश्न
- सेक्शन B: 15 वैकल्पिक प्रश्न (जिनमें से छात्रों को 10 का उत्तर देना होता था)
नए पैटर्न में बदलाव:
अब नीट-यूजी 2025 में सेक्शन बी की वैकल्पिक प्रश्न प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है और सभी 180 प्रश्न अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि छात्रों को समान और निष्पक्ष चुनौती मिले और वे सभी विषयों को समान ध्यान से पढ़ें।
परीक्षा की मुख्य विशेषताएँ:
- कुल प्रश्न: 180 अनिवार्य प्रश्न
- समय सीमा: 3 घंटे (180 मिनट)
- प्रश्नों का स्वरूप: फिजिक्स, केमिस्ट्री, और बायोलॉजी (बॉटनी और जूलॉजी) से कुल मिलाकर 180 प्रश्न होंगे।
- फिजिक्स: 45 प्रश्न
- केमिस्ट्री: 45 प्रश्न
- बायोलॉजी: 90 प्रश्न (बॉटनी और जूलॉजी से मिलाकर)
समय और प्रश्न वितरण:
प्रत्येक छात्र को 180 प्रश्नों का उत्तर 180 मिनट के भीतर देना होगा, जिससे उन्हें प्रति प्रश्न लगभग 1 मिनट का समय मिलेगा।
परीक्षा पैटर्न में बदलाव का असर:
यह नया पैटर्न परीक्षा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है, क्योंकि अब छात्रों के पास कोई वैकल्पिक प्रश्न चुनने का विकल्प नहीं होगा। इससे वे सभी विषयों में अधिक गहराई से अध्ययन करेंगे और बेहतर तैयारी की आवश्यकता होगी।
आकड़ों में परीक्षा प्रणाली:
- पिछला पैटर्न: 180 प्रश्नों में से 150 अनिवार्य और 30 वैकल्पिक थे।
- नया पैटर्न: 180 अनिवार्य प्रश्न, बिना किसी वैकल्पिक प्रश्न के।
तैयारी के सुझाव:
- छात्र अब सभी 180 प्रश्नों के लिए तैयारी करें, क्योंकि किसी भी प्रश्न को छोड़ा नहीं जा सकता।
- फिजिक्स, केमिस्ट्री, और बायोलॉजी के सभी अध्यायों पर समान ध्यान दें।
- समय प्रबंधन की कुशलता विकसित करें, ताकि हर प्रश्न को सही समय पर हल कर सकें।
निष्कर्ष: नीट-यूजी 2025 का नया परीक्षा पैटर्न छात्रों के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है, लेकिन यह सुनिश्चित करेगा कि सभी उम्मीदवार समान और संतुलित परीक्षा दें। तैयारी में गहराई और समग्र दृष्टिकोण अपनाने वाले छात्र ही इस बदलाव का लाभ उठा पाएंगे।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

