Khabarworld24.com -कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार देर रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के बाहर फुटपाथ पर सो रहे मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उनका मुख्य उद्देश्य इन मरीजों के इलाज में आ रही कठिनाइयों को समझना और उनकी समस्याओं को सार्वजनिक रूप से उजागर करना था।
राहुल गांधी ने इन मरीजों से बातचीत की और उनकी परेशानियों को सुना। अधिकांश मरीजों का कहना था कि वे इलाज के लिए कई दिनों से एम्स में आने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन बेड की कमी के कारण उन्हें बाहर खुले आसमान के नीचे सोने पर मजबूर होना पड़ा। इनमें से कई मरीज गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे, जिनमें कैंसर, दिल की बीमारियां और किडनी संबंधी समस्याएं शामिल थीं। मरीजों ने बताया कि सर्दी के मौसम में फुटपाथ पर रात बिताना उनके लिए और भी मुश्किल हो गया है।
मरीजों और उनके परिजनों की समस्याएं:
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: मरीजों ने आरोप लगाया कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल में भी बेड की भारी कमी है, जिसके कारण उन्हें खुले में सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- चिकित्सकों और स्टाफ की कमी: कई मरीजों का कहना था कि लंबी लाइनें और डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज में देरी हो रही है।
- आर्थिक संकट: इलाज के लिए लंबा समय लगने के कारण कई मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों ने बताया कि वे दिन-रात इलाज के लिए एम्स के बाहर इंतजार करने के बावजूद, किसी भी मदद की उम्मीद नहीं कर पा रहे हैं।
राहुल गांधी ने इन समस्याओं को गंभीरता से लिया और मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। मरीजों को अस्पताल में इलाज मिलने की जगह फुटपाथ पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।”
सर्दी और कठिनाइयों के बावजूद संघर्ष:
दिल्ली में इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, और फुटपाथ पर सो रहे मरीजों के लिए यह समय और भी कठिन हो गया है। कुछ मरीजों का कहना था कि वे एक सप्ताह से भी ज्यादा समय से एम्स के बाहर सो रहे थे, और इसके बावजूद उन्हें अंदर इलाज की कोई सुविधा नहीं मिल रही थी।
सरकारी प्रतिक्रिया:
कांग्रेस के नेताओं और मरीजों के परिजनों ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। एम्स प्रशासन ने हालांकि मरीजों की बढ़ती संख्या और अस्पताल के संसाधनों की कमी को स्वीकार किया है, लेकिन सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के लिए एक्शन प्लान का कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया।
राहुल गांधी के इस दौरे के बाद, यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और एम्स प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देंगे और इन मरीजों के लिए त्वरित समाधान प्रदान करेंगे।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

