Khabarworld24.com -नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एक जबरन विवाह मामले में आरोपी व्यक्ति को पत्नी को 4,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने की जमानत शर्त को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने इसे अप्रासंगिक शर्त मानते हुए कहा कि अदालत को सीआरपीसी की धारा 438 के तहत शक्ति का उपयोग करते हुए इस प्रकार की शर्तें नहीं लगानी चाहिए।
मामले का विवरण:
यह मामला बिहार के पूर्णिया जिले से जुड़ा हुआ है, जहां एक महिला का कथित रूप से अपहरण कर शादी करवाई गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि 4,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता कोई बड़ी राशि नहीं है, लेकिन यह मामला पूरी तरह से एक अपहरण और विवाह का अजीब उदाहरण है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी पत्नी के परिवार ने उन्हें अपहरण कर लिया था और इसके बाद एक विवाह समारोह आयोजित किया गया था।
याचिका और कानूनी कार्यवाही:
याचिकाकर्ता ने 2022 में पूर्णिया के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद, 2023 में याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी के साथ विवाह को निरस्त करने के लिए पारिवारिक न्यायालय, पूर्णिया में वैवाहिक मुकदमा दायर किया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत शर्तों पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी अदालत सीआरपीसी की धारा 438 का उपयोग करते हुए अव्यवहारिक और अप्रासंगिक शर्तें नहीं लगा सकती। कोर्ट ने कहा कि यह मामला एक गंभीर प्रकार के जबरन विवाह का है, जिसमें किसी के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि विवाह के मामले में पति की जिम्मेदारी सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि यह सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी भी है।
अदालत का तर्क:
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि किसी भी आरोपी को जमानत देने से पहले यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि उन पर जो शर्तें लगाई जा रही हैं, वे उनके अधिकारों के खिलाफ न जाएं। यह फैसला न केवल न्यायिक दायित्वों को सही दिशा में इंगीत करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अदालतों को संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
आंकड़े और निष्कर्ष:
- शिकायत दर्ज: 2022 में याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पूर्णिया के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।
- मुकदमा दायर: 2023 में पारिवारिक न्यायालय, पूर्णिया में विवाह निरस्तीकरण के लिए मुकदमा दायर किया गया।
- गुजारा भत्ता: जमानत शर्त के तहत आरोपी को 4,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि अदालतें जबरन विवाह और उनके साथ जुड़ी अन्य संवेदनशील समस्याओं में उचित कानूनी प्रक्रिया और न्याय सुनिश्चित करने में संकोच नहीं करतीं।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

