Khabarworld24.com -षटतिला एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इसका नाम तिल के उपयोग से जुड़ा है। इस दिन व्रत और तिल का दान, हवन, स्नान और सेवन अत्यधिक शुभ माना जाता है। 2025 में षटतिला एकादशी का पर्व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चलिए जानते हैं इस व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़े उपाय।
षटतिला एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:
- षटतिला एकादशी व्रत तिथि: 22 जनवरी 2025 (बुधवार)
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 जनवरी 2025 को रात 09:05 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 22 जनवरी 2025 को शाम 06:23 बजे तक
- व्रत पारण का समय: 23 जनवरी 2025 को सुबह 07:12 बजे से 09:23 बजे तक
षटतिला एकादशी पूजा विधि:
षटतिला एकादशी पर व्रत करने वाले व्यक्ति को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। इस दिन व्रती को प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूजा में तिल का विशेष प्रयोग होता है। तिल से तर्पण, हवन, दान और स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, तिल के उबटन से स्नान भी किया जाता है और तिल से बनी वस्तुएं ही भोजन में ग्रहण की जाती हैं। पूजा में इन चरणों का पालन करें:
- प्रातःकाल स्नान: तिल मिले जल से स्नान करें।
- भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाएं और पीले फूल, तुलसी, चंदन और तिल अर्पित करें।
- तिल का तर्पण और हवन: इस दिन तिल से तर्पण और हवन करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
- दान: तिल, वस्त्र, अन्न और जरूरतमंदों को भोजन का दान करें। इस दिन तिल से बने भोजन का विशेष महत्व है।
षटतिला एकादशी व्रत का महत्व:
षटतिला एकादशी व्रत का महत्व इस दिन के कर्मकांडों और तिल के विशेष उपयोग के कारण है। इस व्रत को करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से इस दिन तिल का हवन, तर्पण, स्नान और दान करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस एकादशी पर व्रत रखने से सभी तरह के संकट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि का वास होता है।
षटतिला एकादशी के उपाय:
- तिल का दान: षटतिला एकादशी पर तिल का दान सबसे प्रभावशाली उपाय माना गया है। इसे करने से जीवन में धन-संपदा और सुख-शांति प्राप्त होती है।
- तिल से बने भोजन का सेवन: इस दिन तिल से बनी चीजों का सेवन शरीर को शुद्ध और रोगमुक्त करता है।
- तिल से स्नान: तिल मिले जल से स्नान करने से शरीर की शुद्धि होती है और मानसिक तनाव दूर होता है।
आध्यात्मिक लाभ:
षटतिला एकादशी पर व्रत और पूजा से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होता है। भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, पापों का नाश होता है और पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त होती है। इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है।
निष्कर्ष:
षटतिला एकादशी व्रत 2025 में 22 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन तिल का उपयोग पूजा, दान, हवन और स्नान में किया जाता है। तिल के उपयोग से इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करता है, उसे जीवन में सुख, समृद्धि, और सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति प्राप्त होती है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

