Khabarworld24.com –नई दिल्ली। हाल के शोध से वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली जानकारी दी है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट टूट रही है। इसके परिणामस्वरूप भविष्य में भारत के दो हिस्सों में बंटने की आशंका जताई जा रही है। यह भूगर्भीय घटना हमें अफ्रीका के महाद्वीपीय विभाजन की याद दिलाती है, जब करोड़ों साल पहले अफ्रीका और एशिया अलग हो गए थे और भारतीय उपमहाद्वीप एशिया से जुड़ गया था। यह अध्ययन हमें पृथ्वी के सतह के नीचे चल रहे विशाल भूगर्भीय परिवर्तनों के प्रति सचेत करता है।
भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टकराहट
विज्ञान जगत में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव से ही हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ। यह टकराव लगभग 6 करोड़ साल पहले शुरू हुआ था, जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ रही थी और यूरेशियन प्लेट से टकराई। इस भूगर्भीय टकराव ने हिमालय की ऊंची चोटियों को जन्म दिया, लेकिन इसके साथ ही यह टकराव अब भी जारी है और गहराई में दबाव बढ़ता जा रहा है।
भारतीय प्लेट के विभाजन की चेतावनी
हाल ही में वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान पाया है कि भारतीय प्लेट अब टूटने की स्थिति में है। यह भूगर्भीय घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत की भौगोलिक संरचना में भारी बदलाव आ सकता है। इसके संकेतक ये हैं कि भूमिगत परतों के खिसकने से प्लेट में दरारें पड़ रही हैं और यह धीरे-धीरे विभाजित हो सकती है।
अफ्रीका जैसा विभाजन संभव?
अफ्रीका का इतिहास भी इसी तरह के विभाजन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जब अफ्रीकी प्लेट और एशियाई प्लेट अलग हुईं थीं। अफ्रीका में ग्रेट रिफ्ट वैली (महान दरार घाटी) का निर्माण इसी प्रकार के भूगर्भीय विभाजन के कारण हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह का विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप में भी हो सकता है, जिससे भारत के दो बड़े हिस्सों में विभाजन होने की संभावना है।
हिमालय और भूगर्भीय हलचल
भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टकराहट के कारण ही हिमालय हर साल कुछ मिलीमीटर की दर से ऊंचा हो रहा है। हालांकि, इसके साथ ही भूगर्भीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है, जो इस विशाल पर्वत श्रृंखला के भविष्य के बारे में चिंताएं पैदा कर रहा है। वैज्ञानिकों ने इस पर ध्यान देते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियां बड़े भूकंपों को जन्म दे सकती हैं, जैसा कि 2015 में नेपाल में आया था, जहां 7.8 तीव्रता का भूकंप आया और भारी तबाही हुई।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संभावनाएं
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विभाजन की प्रक्रिया धीरे-धीरे हो रही है और इसे पूरा होने में करोड़ों साल लग सकते हैं। लेकिन इसके संकेतक अभी से स्पष्ट होने लगे हैं। भारतीय प्लेट में पड़ रही दरारें इस ओर इशारा कर रही हैं कि भविष्य में इस महाद्वीपीय प्लेट का विभाजन संभव है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक इस विभाजन के सटीक समय का अनुमान नहीं लगा पाए हैं, लेकिन भूगर्भीय अध्ययन में इसके स्पष्ट प्रमाण मिल रहे हैं।
निष्कर्ष
यह भूगर्भीय घटना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन यह निश्चित रूप से भारत की भौगोलिक संरचना में बड़े बदलाव ला सकती है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नए शोध से यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय प्लेट का विभाजन संभावित रूप से आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण घटना हो सकती है, जिसका प्रभाव न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि मानवीय जीवन पर भी पड़ सकता है। भारतीय वैज्ञानिक इस पर निरंतर अध्ययन कर रहे हैं ताकि इसके संभावित परिणामों का पूर्वानुमान लगाया जा सके और आने वाले खतरों से निपटने के उपाय तैयार किए जा सकें।
संदर्भ:
- भारतीय भूगर्भीय संस्थान, नई दिल्ली
- अंतर्राष्ट्रीय भूगर्भीय शोध पत्रिका, लंदन
- हिमालय पर्वत श्रृंखला पर भूवैज्ञानिक अध्ययन
इस अध्ययन से प्राप्त जानकारियां भारत की भूगर्भीय गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

