Khabarworld24.com -कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने “सच्ची आजादी” को लेकर विवादित बयान दिया था। राहुल गांधी ने कहा कि भागवत का यह बयान देशद्रोह के समान है और यदि यह बयान किसी दूसरे देश में दिया गया होता, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता।
मोहन भागवत का बयान:
दरअसल, मोहन भागवत ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि “सच्ची आजादी” केवल तभी संभव है जब भारतीय समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहे और पश्चिमी सभ्यता की नकल करने से बचें। भागवत ने इस बयान में यह भी कहा था कि “भारत को सच्ची स्वतंत्रता तब मिलेगी जब हम अपनी संस्कृतियों और परंपराओं का पालन करेंगे, न कि विदेशी संस्कृतियों का अंधाधुंध अनुसरण करेंगे।”
राहुल गांधी का आरोप:
राहुल गांधी ने इस बयान पर तीखा विरोध जताया और इसे सीधे तौर पर “देशद्रोह” से जोड़ते हुए कहा, “भारत की आज़ादी लोकतांत्रिक मूल्य और संघर्ष के परिणामस्वरूप मिली है। भागवत का बयान इस स्वतंत्रता के विरुद्ध है और इसका उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करना है। अगर किसी अन्य देश में ऐसा बयान दिया जाता, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता।”
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि संघ प्रमुख का यह बयान भारतीय समाज की विविधता और उसकी एकता को तोड़ने की कोशिश करता है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ऐसे बयान भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को खतरे में डाल सकते हैं।
सांख्यिकी और दृष्टिकोण:
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भारत की आज़ादी: भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त की। इस स्वतंत्रता को प्राप्त करने में हजारों शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान था।
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संघ प्रमुख का इतिहास: मोहन भागवत का संघ प्रमुख के रूप में कार्यकाल 2009 से जारी है और वे अक्सर ऐसे बयान देते रहे हैं, जो समाज के पारंपरिक मूल्यों और पश्चिमी प्रभाव के बीच संतुलन की बात करते हैं।
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कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया: राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस पार्टी ने मोहन भागवत के बयान को तर्कहीन और भारत के समृद्ध लोकतांत्रिक इतिहास के खिलाफ करार दिया है।
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संघ का पक्ष: हालांकि, संघ ने अपने बयान में कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ भारतीय समाज की पारंपरिक और सांस्कृतिक धारा को बनाए रखना है और उनका कोई भी बयान देश की एकता और अखंडता के खिलाफ नहीं है।
इस विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि:
राहुल गांधी और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बीच पिछले कुछ वर्षों से तकरार बनी हुई है, खासकर जब से 2019 में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक बयान दिए थे। इस बार, मोहन भागवत के बयान के बाद राहुल गांधी का यह हमला भाजपा और संघ पर एक नई दिशा में बढ़ते हुए नज़र आ रहा है।
निष्कर्ष:
राहुल गांधी का यह बयान भाजपा और संघ के विचारधारा के खिलाफ उनकी तीव्र आलोचना को दर्शाता है। इसके बावजूद, यह देखना होगा कि इस राजनीतिक विवाद का असर आगामी विधानसभा चुनावों पर किस तरह पड़ता है, विशेषकर राज्य जैसे छत्तीसगढ़ में जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होता है।
यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, जहां दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच विचारधारा का संघर्ष और तेज हो सकता है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

