Khabarworld24.com -केंद्र सरकार ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के लिए दो नई बटालियनों को मंजूरी दी है। इन बटालियनों में 2,000 से अधिक कर्मी शामिल होंगे, जिससे सीआईएसएफ की कुल कर्मी संख्या लगभग 2 लाख तक पहुंच जाएगी। यह कदम देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, खासकर महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे हवाई अड्डों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए।
सीआईएसएफ की बढ़ी जिम्मेदारियाँ और सुरक्षा क्षेत्र
सीआईएसएफ की प्रमुख जिम्मेदारी देश के 68 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, इसके अलावा यह 1969 में गठित होने के बाद परमाणु और एयरोस्पेस क्षेत्र के प्रतिष्ठानों, ताजमहल और लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्मारकों की आतंकवाद-रोधी सुरक्षा भी प्रदान करता है। नई बटालियनों के गठन से इन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में और सुधार होगा और बल के कर्मियों की कार्यक्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार का निर्णय
केंद्र सरकार ने सीआईएसएफ के कर्मियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि यह बल अपनी सुरक्षा सेवाओं को और अधिक प्रभावी तरीके से प्रदान कर सके। दो नई बटालियनों के गठन से सीआईएसएफ को और अधिक मजबूत किया जाएगा, जिससे आतंकवादियों और सुरक्षा के अन्य खतरों से निपटने में मदद मिलेगी।
आंतरिक सुरक्षा के लिए अहम कदम
सीआईएसएफ के प्रवक्ता ने कहा कि इन नई बटालियनों की तैनाती से आंतरिक सुरक्षा को और भी सुदृढ़ किया जाएगा। सीआईएसएफ की सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि से न केवल नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा में मदद मिलेगी, बल्कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा भी बेहतर होगी।
आंकड़ों के अनुसार सीआईएसएफ का विस्तार
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कर्मियों की संख्या: नई बटालियनों के गठन के बाद, सीआईएसएफ में कर्मियों की कुल संख्या लगभग 2 लाख तक पहुँच जाएगी।
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सुरक्षित प्रतिष्ठान:
- 68 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा।
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा।
- ऐतिहासिक स्मारकों जैसे ताजमहल और लाल किला की सुरक्षा।
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स्थापना की वर्ष: सीआईएसएफ की स्थापना 1969 में हुई थी, और तब से यह बल देश के प्रमुख प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहा है।
नई बटालियनों की विशेषताएँ
नई बटालियनों का गठन आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इससे बल के पास और अधिक प्रशिक्षित कर्मी होंगे, जो विभिन्न सुरक्षा खतरों से निपटने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, इन बटालियनों का गठन हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा।
इस निर्णय से सुरक्षा के लिहाज से देश में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिससे नागरिकों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को एक नई दिशा मिलेगी।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

