Khabarworld24.com -कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों को बीमा कंपनियों से मिलने वाले मुआवजे से मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत प्राप्त राशि की कटौती की जाएगी। यह फैसला सड़क हादसे में घायल दंपती द्वारा दाखिल मुआवजे की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
मामला: सड़क हादसे में घायल दंपती का मुआवजा
यह मामला दिसंबर 2010 का है, जब एस. हनुमंतप्पा और उनकी पत्नी एक सड़क हादसे का शिकार हुए थे। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने मुआवजे के लिए बीमा कंपनी के खिलाफ दावा पेश किया। इस मामले की सुनवाई कर्नाटक हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति संजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई।
फैसले का विवरण
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह सड़क हादसे में घायल हनुमंतप्पा के परिवार को 4,93,839 रुपये मुआवजे के रूप में दे, इसके साथ ही 6% वार्षिक ब्याज की दर से मुआवजा भी प्रदान किया जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत परिवार को पहले ही 1.3 लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं, इसलिए इस राशि को मुआवजे से काट लिया जाएगा।
मेडिक्लेम की कटौती पर अदालत का दृष्टिकोण
अदालत ने अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट किया कि मेडिक्लेम के माध्यम से प्राप्त प्रतिपूर्ति राशि को अंतिम मुआवजे की गणना में शामिल करना अनिवार्य है। अदालत का मानना है कि यह राशि चिकित्सा खर्च को कवर करती है, इसलिए मुआवजे की कुल राशि में इसे समायोजित करना न्यायोचित है।
पृष्ठभूमि
10 दिसंबर 2010 को हुई दुर्घटना में हनुमंतप्पा और उनकी पत्नी को एक तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हुए, और उन्हें लंबी चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। दुर्घटना के बाद पीड़ितों ने बीमा कंपनी से मुआवजे की मांग की थी, लेकिन बीमा कंपनी ने मेडिक्लेम के तहत पहले से दी गई प्रतिपूर्ति राशि को मुआवजे से काटने का प्रस्ताव रखा था। इस विवाद को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा।
अदालत का निर्णय: भविष्य में प्रभाव
यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनियों द्वारा मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत दी गई रकम को मुआवजे की अंतिम राशि से काटा जाएगा। इसका सीधा असर उन व्यक्तियों पर पड़ेगा जो सड़क हादसों के बाद मेडिक्लेम पॉलिसी और मुआवजे दोनों के लिए दावा करते हैं।
निष्कर्ष
कर्नाटक उच्च न्यायालय का यह फैसला बीमा दावों और मुआवजे की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। यह सुनिश्चित करता है कि पीड़ितों को उचित मुआवजा मिले, लेकिन अगर उन्हें पहले ही मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत राशि दी जा चुकी है, तो इसे मुआवजे से काटना न्यायोचित होगा।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

