Khabarworld24.com – ओडिशा सरकार ने मीसाबंदियों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है, जिसके तहत अब उन्हें हर महीने ₹20,000 की पेंशन दी जाएगी। यह कदम राज्य सरकार द्वारा ऐतिहासिक और संघर्षशील मीसाबंदियों के योगदान को सम्मानित करने की दिशा में उठाया गया है। इस योजना का लाभ उन सभी मीसाबंदियों को मिलेगा, जिन्होंने आपातकाल (1975-77) के दौरान राजनीतिक गतिविधियों के कारण कैद या हिरासत का सामना किया था।
पेंशन योजना के मुख्य बिंदु:
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पेंशन राशि: ओडिशा सरकार ने मीसाबंदियों के लिए मासिक पेंशन की राशि बढ़ाकर ₹20,000 कर दी है। पहले यह राशि ₹6,000 थी, जिसे अब तीन गुना से अधिक बढ़ा दिया गया है।
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लाभार्थी मीसाबंदी: इस योजना का लाभ उन व्यक्तियों को मिलेगा जो 1975-77 के आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा बंदी बनाए गए थे। इन व्यक्तियों को मीसाबंदी कहा जाता है और उन्होंने उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया था।
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पात्रता: इस पेंशन का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति को आपातकाल के दौरान कम से कम 6 महीने तक जेल में रहना अनिवार्य है। साथ ही, उन्हें इसके लिए सरकार द्वारा प्रमाणित किया जाना होगा।
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सरकार की घोषणा: मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस योजना को राज्य के पूर्ववर्ती मीसाबंदियों के सम्मान में लागू किया है। उनका कहना है कि यह पेंशन योजना मीसाबंदियों के संघर्ष और बलिदान को मान्यता देने का एक प्रयास है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान की जानकारी हो सके।
मीसाबंदियों के संघर्ष और योगदान:
मीसाबंदी वे लोग हैं जिन्हें आपातकाल के दौरान राजनीतिक गतिविधियों के चलते जेल में बंद कर दिया गया था। उनका मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष करना था। यह समय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम मोड़ था, जब लोकतांत्रिक अधिकारों पर व्यापक रूप से रोक लगा दी गई थी।
आकड़े और प्रभाव:
- ओडिशा में कुल मीसाबंदियों की संख्या लगभग 1,200 मानी जा रही है, जिनमें से लगभग 850 लोग इस समय जीवित हैं और इस पेंशन योजना का सीधा लाभ उठाएंगे।
- इस पेंशन योजना के लागू होने से सरकार के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग ₹20 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह खर्च मीसाबंदियों के संघर्ष और योगदान को मान्यता देने के लिए आवश्यक है।
- यह योजना उन मीसाबंदियों के लिए आर्थिक राहत साबित होगी जो वर्तमान में वृद्धावस्था और अन्य सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
समग्र निष्कर्ष:
ओडिशा सरकार की यह पहल मीसाबंदियों के योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल उन परिवारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश जाएगा कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष का हमेशा सम्मान किया जाएगा। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा की गई इस घोषणा का राज्य भर में स्वागत किया जा रहा है, और यह पेंशन योजना अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

