फंदा मुक्त इंद्रावती और सुरक्षित बाघ आवास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष कुमार-बीजापुर। वन्यजीव संरक्षण, अवैध फंदों की रोकथाम तथा बाघों की वैज्ञानिक एवं प्रभावी निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर में फंदा निरोधक एवं बाघ निगरानी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला इंद्रावती टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार गुप्ता एवं उप निदेशक सुमेध संजय सुरवाडे के पर्यवेक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित हुई।फंदा मुक्त इंद्रावती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य इंद्रावती टाइगर रिजर्व को अवैध फंदों से मुक्त बनाने की दिशा में वन क्षेत्रों में गश्त एवं खोज अभियान को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान अवैध फंदों की पहचान, संभावित फंदा प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, फंदों के संकेतों की पहचान, खोज तकनीक, वन क्षेत्र में आवश्यक सावधानियों तथा मैदानी स्तर पर आंकड़ों के संकलन एवं अभिलेखीकरण की जानकारी दी गई। बाघों की वैज्ञानिक निगरानी पर विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला में बाघों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न विधियों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बाघों की जीवन-पद्धति, पदचिह्न एवं अन्य अप्रत्यक्ष संकेतों की पहचान, मल एवं खरोंच के निशान, शिकार किए गए वन्यजीवों के अवशेष, वन्यजीवों के आवागमन वाले मार्ग तथा कैमरा आधारित निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मैदानी निगरानी के दौरान प्राप्त पदचिह्न, मल, खरोंच, शिकार स्थल, कैमरा निगरानी तथा अन्य वन्यजीव संकेतों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाए, ताकि इन आंकड़ों का उपयोग दीर्घकालीन वन्यजीव संरक्षण, बाघों की निगरानी और प्रबंधन योजनाओं में किया जा सके। नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की टीम ने दिया प्रशिक्षण कार्यशाला में तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की टीम द्वारा प्रदान किया गया। प्रशिक्षण दल में एम. सुरज, मोइज अहमद, सिद्धांत जैन एवं भूपेंद्र जगत शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक जानकारी के साथ मैदानी परिस्थितियों में फंदा निरोधक गश्त और बाघ निगरानी को सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया।करीब 100 वन अधिकारी-कर्मचारी हुए शामिल एक दिवसीय कार्यशाला में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 100 वन अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी शामिल हुए। इनमें वन क्षेत्र अधिकारी, उप वन क्षेत्र अधिकारी एवं वनरक्षक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से मनोज बघेल, अनुविभागीय अधिकारी वन, कोर क्षेत्र, अजय कावरे, अनुविभागीय अधिकारी वन, बफर क्षेत्र तथा कुबेर चरण बारिहा, अनुविभागीय अधिकारी वन, भैरमगढ़ सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभी परिक्षेत्र अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।
वन्यजीव संरक्षण एवं निगरानी को मिलेगी नई मजबूती यह कार्यशाला इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अवैध फंदों की रोकथाम और बाघ निगरानी को अधिक व्यवस्थित, वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रही। प्रशिक्षित मैदानी अमले के माध्यम से वन क्षेत्रों में नियमित निगरानी, अवैध फंदों की पहचान, समयबद्ध कार्रवाई तथा बाघ एवं अन्य वन्यजीवों से संबंधित मैदानी आंकड़ों का बेहतर संकलन संभव होगा।


