खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे पहले और बड़े लोकपर्व ‘हरेली तिहार’ का गवाह आज मुख्यमंत्री निवास परिसर बना, जहाँ की सजावट और उत्साह ने राजधानी रायपुर के दिल में एक समृद्ध छत्तीसगढ़ी गांव को साकार कर दिया। कृषि संस्कृति, परंपरा और जन-उत्साह के इस संगम में मुख्यमंत्री निवास का कोना-कोना लोक-रंगों में नहाया नजर आया।
नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस राज्यस्तरीय समारोह में न केवल प्रशासनिक और जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही, बल्कि राज्य के कोने-कोने से आए ग्रामीण, किसान और कलाकार भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
कृषि उपकरणों की पूजा और 100% ग्रामीण परिवेश
हरेली केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था (Agrarian Economy) और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। मुख्यमंत्री निवास परिसर के मुख्य द्वार से लेकर अंदरूनी हिस्सों तक पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से विशेष द्वार और मंडप तैयार किए गए थे।
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कृषि उपकरणों का पूजन: कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाज से नागर (हल), रापा (फावड़ा), कुदाली, गैंती, हंसिया (दराती) और बैलगाड़ी जैसी कृषि सामग्रियों की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
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धान के झालर और बांस की कारीगरी: परिसर में लगभग 1,000 से अधिक धान की बालियों के झालर (झुमर) और पारंपरिक बांस शिल्प का उपयोग कर ठेठ देहाती लुक दिया गया।
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औषधीय नीम की पत्तियां: हरेली की मान्यता के अनुसार बुरी नजर से रक्षा और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए मुख्य द्वारों पर नीम की पत्तियों के बंदनवार सजाए गए।
हरेली पर्व का सबसे पसंदीदा आकर्षण ‘गेड़ी’ (बांस से बनी ऊंची लाठी) रहा। मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे किसानों और अतिथियों ने गेड़ी दौड़ का आनंद लिया।
विशेष संदेश: “हरेली छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ाव, हमारी भावी पीढ़ी को कृषि संस्कृति का महत्व समझाने और हमारी जड़ों को मजबूत करने का त्यौहार है। यह पर्व हमारे अन्नदाताओं की खुशहाली और बेहतर फसल की उम्मीद का नया सवेरा है।”
ठेठ छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक
मुख्यमंत्री निवास पहुंचे आगंतुकों के लिए छत्तीसगढ़ी खान-पान का विशेष प्रबंध किया गया था। इस दौरान चावल आटा, गुड़, चना और उड़द दाल से बने पारंपरिक व्यंजनों जैसे—
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गरम-गरम चीला और फरा (टमाटर-धनिया चटनी के साथ)
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मीठे में ठेठरी, खुरमी और अनरसा
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पारंपरिक अथना आचार और बासी
इन सभी व्यंजनों ने मेहमानों को छत्तीसगढ़ी स्वाद और आतिथ्य का वास्तविक अनुभव कराया।
🌿 पर्यावरण संरक्षण और सुख-समृद्धि की कामना
समारोह के अंत में पौधरोपण कर ‘हरियर छत्तीसगढ़’ (हरा-भरा छत्तीसगढ़) का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस भव्य हरेली उत्सव ने स्पष्ट कर दिया कि आधुनिकता की दौड़ में भी छत्तीसगढ़ अपनी लोक-संस्कृति, किसानों के सम्मान और पारंपरिक धरोहरों को सहेजने में देश में अग्रणी है।



