देवशयनी एकादशी के दिन से ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है और देवउठनी एकादशी के दिन इसका समापन हो जाता है. साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से हो चुकी है और 20 नवंबर को समापन होगा. इस तरह चार मास का चातुर्मास लगभग 119 दिन तक चलने वाला है. चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, इसलिए शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, अब विवाह की तैयारी कर रहे परिवारों को चातुर्मास समाप्त होने का इंतजार करना होगा, इस वर्ष चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर में विवाह के लिए केवल चार प्रमुख शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जिसके चलते शादी समारोहों की भारी मांग रहने की संभावना है, आइए जानते हैं अब कब होंगे विवाह के शुभ मुहूर्त…
शादी-विवाह के लिए ग्रह-नक्षत्र का अध्ययन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए ग्रह-नक्षत्रों और सितारों की स्थितियों का अध्ययन किया जाता है, विवाह और सभी शुभ कार्य में गुरु और शुक्र ग्रह की चाल की स्थिति का भी आकलन किया जाता है, तभी विवाह मुहूर्त निश्चित किए जाते हैं. शुक्र और गुरु ग्रह दोनों ही तारे अस्त हैं तो उस स्थिति में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं निकलता है, दोनों के उदय होने पर ही विवाह और शुभ कार्य जैसे मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं,
चातुर्मास में आते हैं ये व्रत-त्योहार
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चातुर्मास के दौरान पूजा-पाठ, जप, तप, दान, व्रत, कथा श्रवण और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है, इस समय विवाह जैसे मांगलिक संस्कारों से परहेज करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, मान्यता है कि भगवान विष्णु के पुनः जागृत होने के बाद ही शुभ कार्यों का आरंभ करना अधिक फलदायी माना जाता है, धर्मशास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के चार महीने भगवान विष्णु की आराधना, आत्मचिंतन और संयम के लिए सबसे श्रेष्ठ माने जाते हैं, इस दौरान कई बड़े व्रत और पर्व भी आते हैं, जिनमें श्रावण मास, हरियाली तीज, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, पितृ पक्ष, शारदीय नवरात्र और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं,
शादी के केवल 4 मुहूर्त
ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह का मुहूर्त केवल तिथि देखकर तय नहीं किया जाता, बल्कि वर-वधू की कुंडली, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और लग्न का भी विशेष महत्व होता है, इसलिए विवाह की तिथि निश्चित करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित माना जाता है, नवंबर में सीमित शुभ मुहूर्त होने के कारण इस बार विवाह सीजन काफी व्यस्त रहने की संभावना जताई जा रही है. देवउठनी एकादशी के बाद विवाह का शुभ समय शुरू होगा, पंचांग के अनुसार नवंबर में विवाह के लिए केवल चार प्रमुख शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, सीमित मुहूर्त होने के कारण विवाह स्थल, बैंक्वेट हॉल, होटल, कैटरिंग और बैंड-बाजा सहित अन्य सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना है, ऐसे में जिन परिवारों ने अभी तक बुकिंग नहीं कराई है, उन्हें जल्द तैयारी शुरू करने की सलाह दी जा रही है,
नवंबर 2026 विवाह शुभ मुहूर्त
21 नवंबर 2026, शनिवार
24 नवंबर 2026, मंगलवार
25 नवंबर 2026, बुधवार
26 नवंबर 2026, गुरुवार
दिसंबर 2026 विवाह शुभ मुहूर्त
2 दिसंबर 2026, बुधवार
3 दिसंबर 2026, गुरुवार
4 दिसंबर 2026, शुक्रवार
5 दिसंबर 2026, शनिवार
6 दिसंबर 2026, रविवार
11 दिसंबर 2026, शुक्रवार
12 दिसंबर 2026, शनिवार
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