खबर वर्ल्ड न्यूज-मोहला-मानपुर। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने का दम भरने वाले ‘जल जीवन मिशन’ की ज़मीनी हक़ीक़त छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती वनांचल क्षेत्रों में प्रशासनिक अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। नक्सलवाद के साये से बाहर निकले मोहला-मानपुर जिले का पिट्टेमेटा (विकासखंड- मानपुर) गाँव आज एक गंभीर जल-त्रासदी का सामना कर रहा है।
आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बना ओवरहैड वॉटर टैंक गाँव के बीचों-बीच महज़ एक ‘शो-पीस’ (बुत) बनकर खड़ा है, जबकि भरी बरसात में गाँव के बाशिंदे नदी-नालों में गड्ढा (झरिया) खोदकर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
मानपुर विकासखंड का पिट्टेमेटा! कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस महाराष्ट्र सीमावर्ती गांव के बाशिंदों को नक्सलवाद से मुक्ति तो मिल गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और अनदेखी के चलते उपजा अभागापन आज भी इनका पीछा नहीं छोड़ रहा। यही वजह है कि एक ओर जहां बारिश में लोग तर-बतर हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस गांव के बाशिंदे पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर हैं।
दरअसल, गांव में जल जीवन मिशन का पेयजल आपूर्ति कार्य पिछले करीब दो साल से अधूरा है। न तो घर-घर तक पाइप लाइन के जरिए पेयजल पहुंचाने का काम पूरा हो सका है, और न ही पाइप लाइन का बेहतर विस्तार हो पाया है। जल जीवन मिशन के नाम पर केवल पानी टंकी से युक्त टावर खड़ा कर दिया गया है, जो निर्माण के बाद कुछ समय तक घर-घर तो न सही।
अलबत्ता टावर के नीचे टावर में लगे पाइप के जरिए पानी देकर ग्रामीणों के पेयजल का आधार जरूर बना रहा। लेकिन पाइप लाइन विस्तार के नाम पर जो पाइप लाइने गांव में जमीन खोदकर बिछाई गई। वो पाइप लाइन कुछ ही समय में जगह-जगह लीकेज हो गया, जिससे टंकी में सूखा पड़ा हुआ है।
गांव में जल जीवन मिशन के तहत पूर्व से सोलर सिस्टम वाली एक छोटी सी टंकी वाली वर्षों पुरानी लाचार पेयजल व्यवस्था जरूर है, लेकिन उक्त टंकी में भी न तो पानी का पर्याप्त भंडारण हो पाता है, और न ही इस टंकी के नीचे लगी नल पर्याप्त पानी उगल पाती हैं, जिस हैंडपंप से ये पुराना टंकी जुदा है वो हैंडपंप भी टूट फूट कर लीकेज हो रहा है। ऐसे में नल के जरिए बूंद-बूंद टपकते पानी से घंटों खड़ा रहकर अपना छोटा सा मर्तबान भरना भी किसी जंग से कम नहीं है। लिहाजा, ग्रामीण नदी के पानी को ही अपनी प्यास बुझाने का आधार बना रखे हैं।
एक ओर गांव के मुखिया ग्राम पटेल अपने गांव के बाशिंदों को पेयजल त्रासदी से निजात दिलाने की गुहार शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जल जीवन मिशन के जिम्मेदार अफसर अभी कार्रवाई की दुहाई देकर जवाबदेही से बचने का प्रयास करते दिख रहे हैं। इन सब रस्साकसी के बीच ग्रामीण फिलहाल, नदी के झरिया से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
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