नई दिल्ली। बेल का पेड़ भारतीय संस्कृति और परंपरा में बहुत पवित्र माना जाता है। इसके पत्तों का उपयोग पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। आयुर्वेद में भी बेल का उपयोग प्राचीन समय से कई औषधियों और उपचारों में किया जाता रहा है। यह फल न केवल स्वाद से भरा हुआ है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता है।
बेल फल में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें प्रोटीन, वसा, खनिज, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और विटामिन C भी मौजूद होते हैं। बेल में विटामिन B1 और B2 के साथ-साथ कई आवश्यक अमीनो एसिड और प्राकृतिक पौधों से मिलने वाले लाभकारी तत्व (फाइटोकेमिकल्स) भी पाए जाते हैं। शोधों के अनुसार बेल में एल्कलॉइड्स, फ्लेवोनॉइड्स और टैनिन जैसे तत्व अन्य कई औषधीय पौधों की तुलना में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
बीमारियों के लिए घरेलू उपाय
सदियों से इसका उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं, पेट के अल्सर, हेपेटाइटिस और तपेदिक (टीबी) जैसी बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता रहा है। बेल का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और पेट को स्वस्थ रखने में मदद करता है। गर्मियों के मौसम में बेल का शरबत विशेष रूप से फेमस है। इसका स्वाद ताजगी देने वाला और शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला होता है। लंबे समय से भारतीय घरों में बेल का शरबत गर्मी से राहत पाने के लिए पिया जाता रहा है।
बेल का शरबत बनाने की विधि
सबसे पहले बेल फल को तोड़कर उसका गूदा निकाल लें। अब इस गूदे में पानी मिलाकर अच्छी तरह मसलें, ताकि गूदा पानी में पूरी तरह घुल जाए। इसके बाद मिश्रण को छान लें, जिससे रेशे और बीज अलग हो जाएं। तैयार शरबत को कुछ समय के लिए ठंडा कर लें। फिर एक गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें और उसके ऊपर बेल का ठंडा शरबत डालकर परोसें।
कितने बार करना चाहिए सेवन
बेल का रस विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। ऐसे में नियमित रूप से इसका सेवन करने से संक्रमणों से लड़ने की क्षमता बढ़ सकती है और शरीर में सूजन कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं। इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें। K.W.N.S.किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
Trending
- किसानों को खाद-बीज की कोई कमी न हो, छोटे किसानों को मिले प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- किसान बनकर पहुंचे कृषि अधिकारी, खाद की कालाबाजारी का किया खुलासा
- छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई क्रांतिः रायगढ़ बना अग्रणी जिला
- रेत माफियाओं पर प्रशासन का सख्त प्रहार
- शिवाजी महाराज के आदर्श आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत- राज्यपाल डेका
- सुशासन का लक्ष्य जनता के काम समय पर पूरा करना, विभागीय योजनाओं से आर्थिक रूप से सशक्त बनें ग्रामीण- राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा
- वायदे हो रहे पूरे, प्रदेश में है खुशहाली का माहौल- मंत्री टंक राम वर्मा
- सफलता की नई इबारतः आधुनिक मशीनों से सँवर रही धमतरी की खेती


