नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में पसीना बहुत ज्यादा आता है। पसीना, उमस और धूल-मिट्टी के कारण त्वचा पर जलन, घमौरियां और खुजली की समस्या बढ़ जाती है। कई बार लगातार खुजलाने से स्किन लाल हो जाती है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। कई बार लोग खुजाते-खुजाते खून निकाल लेते हैं और इससे समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ आसान देसी नुस्खे त्वचा को ठंडक पहुंचाने और खुजली से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
खुजली से राहत दिलाएंगे ये 5 नुस्खे
एलोवेरा जेल का करें यूज : ताजा एलोवेरा का गूदा निकालकर प्रभावित जगह पर 15-20 मिनट के लिए लगाएं। इसके बाद साफ पानी से धो लें। एलोवेरा में मौजूद शीतल गुण त्वचा की जलन और खुजली को शांत करने में मदद कर सकते हैं। दिन में 2-3 बार इसका यूज किया जा सकता है।
नीम के पानी से स्नान करें : एक मुट्ठी नीम की पत्तियों को पानी में उबाल लें। पानी ठंडा होने पर उससे नहाएं या खुजली वाली जगह को धोएं। नीम में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को साफ रखने और खुजली से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। यह गर्मियों में सबसे लोकप्रिय घरेलू नुस्खों में से एक माना जाता है।
चंदन और गुलाब जल का लेप : एक चम्मच चंदन पाउडर में जरूरत के अनुसार गुलाब जल मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे खुजली और जलन वाली जगह पर लगाएं। सूखने के बाद साफ पानी से धो लें। चंदन त्वचा को ठंडक देता है, जबकि गुलाब जल त्वचा को तरोताजा महसूस कराता है।
खीरे का रस लगाएं : खीरे को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें और कॉटन की मदद से प्रभावित हिस्से पर लगाएं। चाहें तो खीरे के ठंडे स्लाइस भी रख सकते हैं। खीरा त्वचा को ठंडक पहुंचाने में मदद करता है और गर्मी से होने वाली खुजली व जलन को कम कर सकता है।
मुल्तानी मिट्टी का पैक लगाएं : दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल या ठंडा पानी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे प्रभावित हिस्से पर लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। मुल्तानी मिट्टी त्वचा की अतिरिक्त गर्मी और पसीने को सोखने में मदद करती है, जिससे खुजली और घमौरियों में राहत मिल सकती है।
ये उपाय भी दिलाएंगे राहत
खाज-खुजली से बचने के लिए दिन में पर्याप्त पानी पिएं, ढीले सूती कपड़े पहनें और त्वचा को साफ व सूखा रखें। अगर खुजली लगातार बनी रहे, त्वचा पर पस बनने लगे या तेज लालिमा दिखाई दे, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। कई बार खुजली के पीछे फंगल इन्फेक्शन, एलर्जी या अन्य त्वचा रोग भी हो सकते हैं, जिनके लिए ट्रीटमेंट जरूरी होता है।
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